देश में बाढ़ और सूखे का खतरा अब अलग-अलग क्षेत्रों तक सीमित नहीं रह गया है। कई जिलों में दोनों आपदाओं के प्रति संवेदनशीलता बढ़ रही है। आईआईटी रुड़की के शोधकर्ताओं के एक अध्ययन के अनुसार वर्ष 2011 तक देश के पांचवें हिस्से से अधिक जिले बाढ़ के प्रति अत्यधिक संवेदनशील श्रेणी में पहुंच गए थे।
इसके अनुसार उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल समेत पूर्वी और उत्तरी भारत के कई क्षेत्रों में दोनों आपदाओं से निपटने की तैयारी पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
नेचर पोर्टफोलियो की शोधपत्रिका एनजेपी नेचर हेजार्डमें प्रकाशित इस अध्ययन में वर्ष 2001 और 2011 के दौरान देश के 591 जिलों की स्थिति का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने सामाजिक-आर्थिक स्थिति, जनसंख्या और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े आंकड़ों के आधार पर यह समझने का प्रयास किया कि किन जिलों में बाढ़ और सूखे का सामना करने की क्षमता कमजोर है।
अध्ययन में सामने आया कि बाढ़ और सूखे के प्रति संवेदनशीलता देश के सभी हिस्सों में एक समान नहीं है। पूर्वी और उत्तरी भारत के कई क्षेत्रों में दोनों आपदाओं के प्रति संवेदनशील जिलों की संख्या बढ़ी है। ओडिशा, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, बिहार और झारखंड के विभिन्न जिलों में दोनों आपदाओं के प्रति संवेदनशीलता बढ़ने के संकेत मिले। उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल ऐसे राज्यों में शामिल रहे जहां बाढ़ और सूखे दोनों का जोखिम महत्वपूर्ण पाया गया।
आईआईटी रुड़की के प्रो. मोहित प्रकाश मोहंती ने बताया कि बाढ़ और सूखे को आमतौर पर अलग-अलग आपदाओं के रूप में देखा जाता है लेकिन दोनों का असर एक ही क्षेत्र के लोगों, आजीविका, जल संसाधनों और बुनियादी सुविधाओं पर पड़ सकता है। ऐसे में दोनों जोखिमों को एक साथ समझना जरूरी है।
इससे उन क्षेत्रों की पहचान करने में मदद मिलेगी, जहां आपदा से निपटने और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए विशेष तैयारी की आवश्यकता है। यह अध्ययन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से आईआईटी रुड़की में किया गया। शोध में प्रियंका त्रिपाठी, देव आनंद ठाकुर, विट्ठल हरि और प्रो. मोहित प्रकाश मोहंती शामिल रहे।