इंदौर (मध्यप्रदेश) की गैंगरेप पीड़िता बुधवार सुबह अपने पिता के साथ पहले कलियर पहुंची। उसके बाद एसपी देहात के सामने बयान दर्ज कराए। आरोप लगाया कि कलियर पुलिस ने आरोपियों को पकड़ने के बजाय उसे लोकलाज का वास्ता देकर ट्रेन में बैठा दिया था। जबकि वह आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करती रही।
दोपहर में रुड़की पहुंची पीड़िता ने एसपी देहात मणिकांत मिश्रा को बताया कि दो-तीन माह में वह एक बार कलियर में हाजिरी देने आती है। दो दिसंबर को भी वह अपने एक रिश्तेदार के साथ दरगाह पर हाजिरी लगाने आई थी। रात के समय दो युवक उसे जबरन अपने साथ शाहजी पीर के समीप जंगल में ले गए। यहां उन्होंने पहले उसके हाथ बांधे फिर गलत काम किया। जब वह चिल्लाई तो कुछ लोग मौके पर पहुंच गए। उन्होंने उसे कंबल आदि दिया। सूचना पर पुलिस भी पहुंच गई और उसे थाने ले गई। उसके बाद पुलिस को उसने आपबीती बताई लेकिन, पुलिस ने उसे लोकलाज का वास्ता देकर चलता कर दिया। सुबह जब उसे पता चला कि पुलिस को मौके से एक पर्स और पहचान पत्र आदि भी मिला है तो वह फिर थाने पहुंच गई। उसने पुलिस से आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की लेकिन, पुलिस ने उसे बताया कि पहचान पत्र फर्जी है।
उससे आरोपियों को पता नहीं लग पाएगा। वह चुपचाप अपने घर चली जाएं। पुलिस ने उसे जबरन 600 रुपये पकड़ाए। उसके बाद रुड़की स्टेशन पहुंचाया और एक ट्रेन में बिठा दिया। यहां से वह राजस्थान पहुंची। वहां से वह अपने घर इंदौर (मध्यप्रदेश) पहुंची तो उसके पिता ने बताया कि उसकी तलाश में पुलिस आई थी। उसके तुरंत बाद वह अपने पिता को साथ लेकर कलियर पहुंची। एसपी देहात मणिकांत मिश्रा ने बताया कि पीड़िता के बयान दर्ज कर लिए हैं। इससे मामले की जांच पड़ताल में काफी मदद मिलेगी। आरोपियों की तलाश शुरू कर दी गई है। जांच में पुलिस की लापरवाही सामने आएगी तो कार्रवाई होना तय है।