सिविल अस्पताल में रोजाना आठ से 10 महिलाएं एनीमिया की शिकायत लेकर पहुंच रहीं
लापरवाही बन रही गंभीर बीमारियों की वजह
रुड़की। महिलाओं में एनीमिया (खून की कमी) की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। सिविल अस्पताल में प्रतिदिन आठ से 10 एनीमिया ग्रसित महिलाएं पहुंच रहीं हैं। महिलाएं कमजोरी, चक्कर, थकान और सिर दर्द जैसी शिकायतों के साथ अस्पताल पहुंच रही हैं। जांच में अधिकांश महिलाओं में हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य से काफी कम पाया जा रहा है।
सिविल अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ़ कमल ने बताया कि एनीमिया का सबसे बड़ा कारण शरीर में आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन बी-12 की कमी है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों और निम्न आय वर्ग की महिलाओं में यह समस्या अधिक देखने को मिल रही है। घरेलू कामकाज के साथ-साथ पोषण की अनदेखी और समय पर स्वास्थ्य जांच न कराना इस बीमारी को बढ़ावा दे रहा है। डॉ़ कमल ने बताया कि गर्भवती महिलाओं और किशोरियों में एनीमिया का खतरा सबसे ज्यादा होता है। गर्भावस्था के दौरान खून की कमी मां और होने वाले बच्चे दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकती है। वहीं, किशोरियों में एनीमिया का असर शारीरिक और मानसिक विकास पर पड़ता है। उन्होंने सलाह देते हुए कहा कि महिलाएं नियमित रूप से अपनी स्वास्थ्य जांच कराएं और किसी भी तरह की कमजोरी को हल्के में न लें। समय पर इलाज और सही पोषण से एनीमिया को पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है।
एनीमिया के लक्षण
लगातार थकान रहना।
सांस फूलना।
चक्कर आना।
त्वचा का पीला पड़ना।
हाथ-पैर ठंडे रहना और दिल की धड़कन तेज होना।
एनीमिया के बचाव
एनीमिया से पीड़ित महिलाएं आयरन की दवा का सेवन करें।
संतुलित आहार, हरी सब्जियां, दालें, गुड़, चुकंदर और आयरन युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करें।
समय-समय पर खून की जांच कराएं।