रुड़की। यह जरूरी नहीं है कि वंशानुगत बीमारी परिवार में हर व्यक्ति को हो। इस आधार पर बीमा कंपनी बीमा क्लेम को निरस्त नहीं कर सकती। एक मामले में यह व्यवस्था देते हुए उपभोक्ता फोरम ने लाभार्थी को उपचार में खर्च हुई डेढ़ लाख से अधिक की धनराशि का भुगतान करने का फैसला कराया है।
उपभोक्ता मामलों के वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीगोपाल नारसन ने बताया कि सिविल लाइन रुड़की निवासी रीतू अरोड़ा व उनके पति देवेंद्र अरोड़ा ने स्टार हेल्थ एंड एलाइड बीमा कंपनी से हेल्थ बीमा फैमिली पॉलिसी कराई थी। बीमित अवधि में रीतू अरोड़ा के पेट में अल्सर हो गया। जिसके इलाज में उनके एक लाख 67 हजार 795 रुपये खर्च हुए। लेकिन बीमा कंपनी को उक्त धनराशि का क्लेम दावा करने पर भी बीमा कंपनी ने यह कहकर क्लेम दावा निरस्त कर दिया कि बीमित व्यक्ति ने अपनी मेडिकल हिस्ट्री का खुलासा बीमा कराते समय नहीं किया था। इस पर रीति अरोड़ा और उसके पति देवेंद्र अरोड़ा ने उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया। उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष गिरीश मोहन मित्तल व सदस्य प्रदीप पालीवाल ने सुनवाई के बाद बीमा क्लेम न दिए जाने को उपभोक्ता सेवा में कमी माना और बीमा कंपनी को आदेश दिया कि वह एक माह के अंदर बीमे की राशि के सापेक्ष उपचार के खर्च हुई राशि अंकन एक लाख 63 हजार 195 रुपये का भुगतान छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर के साथ अदा करें।