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मोदी सरकार से पूरी नहीं हुई आशा : अरुणा रॉय

Mon, 14 Dec 2015 11:45 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की
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रुड़की। मैग्सेसे पुरस्कार प्राप्त समाजसेवी अरुणा रॉय ने कहा कि अभी तक मोदी सरकार से कुछ नहीं मिला है। आम आदमी के लिए खाद्य सुरक्षा की नीति सामने नहीं लाई गई। मनरेगा का बजट खत्म हो गया है और सूचना के अधिकार के लिए कमिश्नर की नियुक्ति जैसी मांगें अधर में लटकी हुई है। यह बात उन्होंने आईआईटी रुड़की में आयोजित स्पिक मैके के कार्यक्रम के दौरान किए गए कुछ सवालों के जवाब देते हुए कही।
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उन्होंने कहा कि देश में अभी भी दक्षिणपंथी सोच के आधार पर नीतियों का निर्धारण हो रहा है। जिसका लाभ 10 प्रतिशत लोगों के हक में है। मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना के लिए बजट खत्म हो गया है। वहीं सूचना अधिकार को और मजबूत बनाए जाने की दिशा में काम होना बाकी है। दीक्षांत भवन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि हम पांच साल के लिए नेताओं को अधिकार और संप्रभुता देते हैं। हमें यह स्मरण रखना होगा कि हमें देश में खर्च हो रहे अरबों खरबों रुपये का हिसाब किताब मांगने का हक है। उन्होंने सूचना के अधिकार के साथ-साथ जानने के अधिकार के प्रति जागरूक होने पर जोर दिया। कहा कि सूचना के अधिकार से लोगों को लाभ मिला है। पहले लुटेरे ऊंटों पर और बंदूकों के दम पर लूटपाट करते थे। अब वर्चुअल अपराध के जरिए 2 जी और व्यापम जैसे घोटालों से लूट हो रही है। जहां गलत हो उसके बारे में बोलना चाहिए।
अन्य से थोड़ा भिन्न हैं केजरीवाल
दिल्ली के मुख्यमंत्री के विषय में पूछे गए एक सवाल के जवाब में अरुणा रॉय ने कहा कि पहले वे भी लोगों के लिए सूचना का अधिकार मांगते थे। लेकिन सत्ता में हैं तो बहुत चीजें बदल गई हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या केजरीवाल की कार्यशैली भी अन्य राजनेताओं की तरह ही है। तो उन्होंने कहा कि केजरीवाल अन्य राजनेताओं से थोड़ा भिन्न हैं। अभी यह देखना होगा कि वह जो कहते थे उसमें कितना कर पाते हैं।
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‘वह तोड़ती पत्थर’
- समाजसेवी अरुणा रॉय का व्याख्यान खत्म होने के बाद एक महिला ने उनसे सवाल किया कि वे स्त्री के अधिकारों की बात करतीं हैं लेकिन आज भी देश की लाखों स्त्रियां सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की ‘वह तोड़ती पत्थर’ कविता का जीता जागता उदाहरण बनी हुई हैं। आखिर कब पुरुष और महिलाओं के बीच का यह अंतर खत्म होगा। इस पर अरुणा रॉय ने कहा है कि स्थिति धीरे-धीरे बदल रही है। पूरी तरह सफलता के लिए और संघर्ष करना होगा। उन्होंने कहा कि दशकों पहले की तुलना में अब देश की स्थिति में सुधार हो रहा है। इसमें नरेगा और सूचना का अधिकार जैसी योजनाओं से काफी मदद मिली है।
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