फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Roorkee News: नहरों की मरम्मत के लिए विभाग ने भेजा प्रस्ताव, स्वीकृति मिले तो किसानों को मिलेगी राहत

विज्ञापन
विज्ञापन
क्षतिग्रस्त गूल और नहरों की अनदेखी से नहीं हो पा रही है खेतों की सिंचाई
विज्ञापन

दो साल से नहीं हुई ग्रामीण क्षेत्रों में नहरों की मरम्मत

ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई के लिए बनी गूल और नहरों की मरम्मत दो वर्ष से नहीं हुई। अधिशासी अभियंता सिंचाई की ओर से क्षतिग्रस्त गूल और नहरों के कुल 60 से अधिक जगहों को चिह्नित कर उनके मरम्मत का प्रस्ताव भेजा जा चुका है।
शहर की मुख्य नहर से जुड़ी कई अन्य शाखाओं गूल, माइनर और सिंचाई नहरों के मरम्मत कार्य नहीं होने से जहां-तहां पानी बह जाता है। धान के सीजन में किसानों ने बारिश के पानी या अन्य संसाधनों से काम चलाया। अब जब गेहूं की बुवाई का समय आया तो वह फिर से अपनी फरियाद लेकर दफ्तरों के चक्कर काटने लगे हैं।
विज्ञापन

वहीं, सिंचाई विभाग के अधिकारियों की मानें तो लालढांग के चमारिया माइनर, नया गांव में क्षतिग्रस्त नहरों के मरम्मत के लिए करीब 7.60 लाख, रवासन नदी से जुड़ी नहर में रसूलपुर में कटाव रोकने के लिए 4 लाख से अधिक व जलधार के लिए 1.9 लाख रुपये की कार्य योजना बनाकर जिलाधिकारी को सौंपी गई है।

उत्तराखंड सिंचाई विभाग ने न केवल जगहों को चिह्नित किया है, बल्कि क्षतिग्रस्त नहर, गूल या माइनर की फोटो को भी प्रस्ताव के साथ संलग्न किया है। वहीं, शासन स्तर पर इस प्रस्ताव को लेकर अभी तक चर्चा तक नहीं की गई है। ग्राम्य आपदा न्यूनीकरण के तहत मांगे गए प्रस्ताव पर कई बैठकों में चर्चा भी हुई, बावजूद इसके यह समस्या विभाग के उच्चाधिकारियों के लिए नगण्य है।
क्षतिग्रस्त नहरों के चलते इन क्षेत्रों में हो रही बड़ी परेशानी
किसान ने गेहूं बुवाई से पहले अपने संसाधन से खेत तैयार कर लिए हैं। नहरें इतनी बेकार है कि सिंचाई विभाग पानी छोड़ता है तो खेत तक नहीं पहुंचता है। प्रस्ताव को स्वीकृति मिलने से लालढांग व रसूलपुर मीठीबेरी ग्राम पंचायत, नयागांव, चमरिया, डालूपुरी कटेबड़, मोल्हापुरी, जसपुर चमरिया, रसूलपुर, रसूलपुर गोट, आर्यनगर मीठीबेरी, डंडिया नवाला समेत 50 से अधिक गांवों के किसानों को इसका लाभ मिल सकेगा।
विज्ञापन



समस्या के संबंध में पूर्व में भी किसानों से शिकायत मिली थी। इस पर जांच कराई गई, जिसमें कई गूल और नहरें क्षतिग्रस्त मिली हैं। विभाग की ओर से इन नहरों के कुछ जगहों पर काम अपने स्तर पर कराए गए। उन जगहों पर धनाभाव के चलते कार्य नहीं हो पाया है, जहां पर कटाव की अधिक संभावना है या हो रहा है। फिलहाल प्रयास किया जा रहा है और उच्चाधिकारियों को समस्या से अवगत करा दिया गया है। उम्मीद है जल्द ही मरम्मत का कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा। मंजू डैनी, अधिशासी अभियंता सिंचाई विभाग, हरिद्वार
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें