रुड़की। नगर निगम में ठेकेदार पर हमले के अगले दिन शुक्रवार को सड़कों के टेंडर खोलने की प्रक्रिया पुलिस की मौजूदगी में संपन्न करानी पड़ी। शाम तक करीब 80 लाख के टेंडर खोल दिए गए। इस दौरान नगर निगम परिसर में ठेकेदारों का जमावड़ा लगा रहा। वहीं, तकनीकी खामी के चलते 20 में से तीन टेंडर निरस्त कर दिए गए। इन टेंडरों को दोबारा जारी किया जाएगा।
नगर निगम ने हाल में विकास कार्यों के लिए तीन करोड़ के टेंडर जारी किए हैं। कोरोना के चलते 101 विकास कार्यों के टेंडर अलग-अलग दिन खोले जा रहे हैं ताकि एक साथ ज्यादा भीड़ न हो। बीते बृहस्पतिवार को टेंडर की खरीद के दौरान ठेकेदार संजय गुप्ता उर्फ नीलू पर दो बदमाशों ने नगर निगम परिसर में हमला कर दिया था। ठेकेदार ने लाइसेंसी पिस्टल निकाली तो वे फरार हो गए थे। पुलिस ने घटना की जांच पड़ताल शुरू कर दी थी। ऐसे में शुक्रवार को टेंडर खोलने की प्रक्रिया के दौरान बवाल की आशंका थी। लिहाजा नगर आयुक्त नूपुर वर्मा ने सिविल लाइंस कोतवाली प्रभारी राजेश साह से पुलिस की मांग की थी। दोपहर करीब तीन बजे शुरू हुई प्रक्रिया के दौरान एसएसआई प्रदीप कुमार समेत कई पुलिसकर्मियों की निगम सभागार और बाहर तैनाती की गई। पुलिस की मौजूदगी में एक-एक कर टेंडर खोले गए। नगर आयुक्त ने बताया कि 20 टेंडरों की प्रक्रिया पूरी की गई है। तीन टेंडरों को तकनीकी खामी के चलते निरस्त कर दिया गया। इस दौरान मेयर गौरव गोयल, एमएनए नूपुर वर्मा, सहायक नगर आयुक्त चंद्रकांत भट्ट, जेई जगदीश प्यारेलाल, एकाउंटेंट गिरधर गोपाल मौजूद थे।
--
हमले की जांच में बेनकाब हो सकते हैं कई बड़े चेहरे
पुलिस ने कई लोगों से की पूछताछ, खंगाले जा रहे सड़क पर लगे सीसीटीवी कैमरे
रुड़की। नगर निगम में ठेकेदार पर हुए हमले की पुलिस बारीकी से जांच कर रही है। सूत्रों के अनुसार, जांच में कई बड़े चेहरे भी बेनकाब हो सकते हैं। हालांकि, पुलिस को अभी तक तहरीर नहीं मिली है। पुलिस को सीसीटीवी कैमरे की मदद से उस बाइक के बारे में महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे हैं, जिससे बदमाश फरार हुए थे। पुलिस बाइक का नंबर ट्रेस करने में जुटी है।
ठेकेदार संजय गुप्ता उर्फ नीलू पर हमला करने वाले बदमाशों के साथ-साथ पुलिस उन चेहरों को भी बेनकाब करने की कोशिश में है, जिनके इशारे पर घटना को अंजाम दिया गया। यह तो साफ हो रहा है कि टेंडर को लेकर ही हमला हुआ था, जिसका मकसद ठेकेदारों में खौफ पैदा करना था, लेकिन पूरे खेल के पीछे कौन लोग थे, यह जानना पुलिस के लिए बेहद जरूरी है। कोतवाली प्रभारी राजेश साह ने बताया कि बदमाशों की धरपकड़ के लिए कुछ लोगों से पूछताछ की गई है। शहर में लगे सीसीटीवी कैमरे की मदद से बाइक की पहचान की गई है। कैमरे में नजर आ रही नंबर प्लेट के नंबर को ट्रेस किया जा रहा है। जल्द ही बदमाशों को पकड़ा जाएगा।
--
राजनीतिक दुश्मनी भी हो सकती है कारण
टेंडर प्रक्रिया को लेकर हुए हमले के साथ ही इसे राजनीतिक रंजिश से भी जोड़कर देखा जा रहा है। जिस ठेकेदार संजय गुप्ता पर हमला हुआ था, वह नगर निगम चुनाव से पहले भाजपा में थे और शहर विधायक प्रदीप बत्रा के प्रतिनिधि थे, लेकिन नगर निगम चुनाव में गौरव गोयल के निर्दलीय चुनाव लड़ने से पहले ही संजय गुप्ता मेयर के पाले में आ गए थे। यह बात और है कि मेयर बनने के बाद संजय गुप्ता ने उनसे किनारा कर लिया था। ऐसे में इस हमले के राजनीति निहितार्थ भी निकाले जा रहे हैं।