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यूपी के तौकीर गैंग ने की थी शहर में दोनों डकैती

Tue, 26 Apr 2016 12:16 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला रुड़की
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रुड़की। शहर में फरवरी 2014 में कमला नर्सिंग होम और सितंबर 2015 मेें प्रॉपर्टी डीलर मौफीक के घर डकैती में आखिरकार यूपी के तौकीर गैंग का हाथ निकला। दिल्ली पुलिस ने सरगना तौकीर सहित दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। जबकि गिरोह के तीन साथी पुराने मामले में जमानत तुड़वाकर सहारनपुर जेल चले गए। एक आरोपी अभी भी फरार है। पकड़े गए आरोपियों के कुबूलनामे के बाद अब रुड़की पुलिस उन्हें बी वारंट पर दिल्ली व सहारनपुर से लाने में जुट गई है।
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सलेमपुर रोड स्थित डा. रविंद्र सैनी के कमला नर्सिंग होम में फरवरी 2014 में सुबह सुबह लाखों की डकैती पड़ी थी। बदमाशों ने हथियारों के बल पर बंधक बनाते हुए नगदी जेवर लूट लिए थे। वहीं सितंबर 2015 में सोलानीपुरम कॉलोनी निवासी प्रॉपर्टी डीलर मौफीक के परिवार को दिन दहाड़े बंधक बनाकर लाखों की डकैती को अंजाम दिया गया था।

दोनों ही घटनाओं के खुलासे के लिए गंगनहर कोतवाली पुलिस और सिविल लाइंस कोतवाली पुलिस वेस्ट यूपी की खाक छान चुकी थी, मगर खुलासा नहीं हो पाया। अब तीन दिन पहले दिल्ली पुलिस ने खतौली के मोहल्ला काजियान निवासी तौकीर व पुरकाजी सरोगियान निवासी प्रवेज को गिरफ्तार कर लिया। गंगनहर कोतवाली प्रभारी जवाहर लाल और सिविल लाइंस कोतवाली से एसएसआई गोविंद कुमार आरोपियों से पूछताछ के लिए दिल्ली पहुुंचे। जहां दोनों ने कमला नर्सिंग होम और मौफीक के घर डकैती की बात कुबूल कर ली।
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इसी बीच गिरोह के सदस्य दिलशाद निवासी सहारनपुर, राजू उर्फ रियाजुद्दीन व गुलबहार निवासी गंगोह पुराने मामले में जमानत तुड़वाकर सहारनपुर जेल पहुंच गए। लोनी निवसाी आसिफ अभी फरार चल रहा है। आरोपियों को बी वारंट पर रुड़की लाने के लिए पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी। गंगनहर कोतवाली प्रभारी जवाहर लाल और सिविल लाइंस कोतवाली एसएसआई गोविंद कुमार ने बताया कि आरोपियों से डकैती का माल बरामद करने के लिए उन्हें कानूनी प्रक्रिया के तहत जल्द ही रुड़की लाया जाएगा।

 हाथ मलती रह गई पुलिस, एसओजी नाकाम
शहर की दोनों कोतवालियों की पुलिस ने डकैती के खुलासों में पूरी ताकत झोंकी थी। रुड़की एसओजी ने भी खूब हाथ पांव मारे। मगर गिरोह आखिरकार दिल्ली पुलिस की पकड़ में आ गया। दरअसल यूपी में डकैती डालने वाले गिरोह की पड़ताल का ज्यादातर जिम्मा एसओजी को दिया गया था। मगर रुड़की एसओजी गिरोह का सुराग लगाने में पूरी तरह नाकाम रही। बदमाशों को पकड़ने के लिए एसओजी न सर्विलांस का जाल बुन पाई और न मुखबिर तंत्र को सक्रिय कर पाई। यूपी में नेटवर्क की कमी भी एसओजी की असफलता का कारण बनी। पहली डकैती से अब तक करीब पांच एसओजी प्रभारी बदले गए, मगर अधिकांश टीम पुरानी होने के बावजूद कोई कारनामा नहीं दिखा पाई। इससे एसओजी के पुर्नगठन के आसार और बढ़ गए हैं।

 दिलशाद करता था रैकी
डकैती को अंजाम देने के लिए सहारनपुर निवासी दिलशाद कपड़े की फेरी लगाने के बहाने रैकी करता था। आने और भागने के रास्तों से पूरी तरह वाकिफ होने के बाद गिरोह को बुला लिया जाता था और हथियारों के बल पर तसल्ली से डकैती को अंजाम दिया जाता था।

 गिरोह पर दर्ज हैं डकैती के 18 मुकदमे
पूछताछ में गिरोह पर डकैती के 18 मुकदमे दर्ज होने की बात सुनकर पुलिस भी हैरत में पड़ गई। आरोपी यूपी उत्तराखंड समेत अलग अलग राज्यों में डकैती करते थे। उनका अगला निशाना गुजरात था। गुजरात जाने के दौरान ही सरगना तौकीर व प्रवेज को गिरफ्तार किया।
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