नारसन। 85 करोड़ रुपये का गन्ना बेचने के बाद भी किसानों के हाथ खाली हैं। स्थिति यह है कि उन्हें बेटियों के हाथ पीले करने के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं। परेशान किसानों का दल शनिवार को उत्तम शुगर मिल पहुंचा और प्रबंधन से भुगतान की गुहार लगाई। साथ हीं लाड़लियों के विवाह करने का हवाला दिया। जब इस पर भी मिल प्रबंधन भुगतान को राजी नहीं हुआ तो किसानों ने उग्र रूप धारण कर लिया। उन्होंने तत्काल मिल की क्रेसिंग चेन में ही कूदकर जान देने की चेतावनी दी। जिस पर मिल प्रबंधन के हाथ पांव फूल गए और सोमवार तक भुगतान का भरोसा दिया।
लिब्बरहेड़ी स्थित उत्तम शुगर मिल की ओर से चालू सत्र में लगातार गन्ना खरीदा जा रहा है, लेकिन अभी तक मिल की ओर से महज चंद दिनों का ही भुगतान किया गया है। चालू पेराई सत्र में उत्तम शुगर मिल की ओर से अभी तक करीब 37 लाख क्विंटल गन्ना खरीदा जा चुका है। जिसकी कीमत करीब एक अरब 73 लाख रुपये बैठती है, लेकिन इस खरीदे गए गन्ने में से मिल की ओर से महज दस दिसंबर तक का 15 करोड़ रुपये का भुगतान ही किया गया है। जिससे पर मिल किसानों का तकरीबन 85 करोड़ 73 लाख रुपये दबाए बैठा है। जिससे वैसे तो सभी किसान ही मिल प्रबंधन की ओर से करोड़ों रुपये पर कुंडली मारे बैठे रहने से परेशान हैं ही, लेकिन शनिवार को बेटियों की डोलियों को उठाने की तैयारी कर रहे किसान भाकियू नेताओं के साथ मिल में पहुंच गए। किसानों ने मिल प्रबंधन के सामने बेटियों के विवाह के कार्ड रखकर तुरंत भुगतान की मांग, लेकिन मिल प्रबंधन ने वही अपना रटा रटाया वाक्य कि अभी पैसे ही नहीं है, तो भुगतान कहां से कर दें सुनकर किसानों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया।
आग बबूला हुए किसानों ने बेटियों की शादियों के लिए भुगतान नहीं मिलने पर मिल में ही चल रही क्रेसिंग की चेन में कूदकर आत्महत्या करने की चेतावनी दे डाली। किसानों की धमकी से मिल प्रबंधन के हाथ पांव फूल गए। जिस पर मिल के एजीएम लोकेंद्र लांबा ने सोमवार तक किसानों को हर हाल में भुगतान करने का आश्वासन दिया, तब जाकर किसान माने और शांत होकर लौटे। इस मौके पर भाकियू के मंडलाध्यक्ष संजय चौधरी, बालीन्द्र, सुदेश पाल, ओम सिंह अशेाक कुमार, नत्थूराम, मांगा, सौरण,राजसिंह, अरविन्द, रवि कुमार, यशवीर सिंह, विजय शास्त्री, सुकरमपाल आदि मौजूद रहे।
इकबालपुर पर पिछले साल का भी भुगतान
नए सत्र में नहीं दिया एक भी धेला
भुगतान के मामले में सबसे पीछे चल रहे इकबालपुर शुगर मिल ने नए सत्र का भुगतान तो एक रुपये का भी किया ही नहीं है, लेकिन मिल पर पिछले साल का भुगतान भी अवशेष चल रहा है। मिल की ओर से लगातार किसानों एवं प्रशासन के अधिकारियों के साथ वादे किए जा रहे हैं, लेकिन एक भी वादा मिल प्रबंधन की ओर से पूरा नहीं किया जा रहा है। जिससे मिल से जुड़े किसानों का तो गन्ने की खेती से ही मोह भंग होता जा रहा है।