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10 खनन पट्टों पर रोक

Tue, 01 Mar 2016 12:06 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की
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रुड़की/बुग्गावाला। राजाजी नेशनल पार्क की एसटीएफ टीम की अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई के बाद स्थानीय प्रशासन की नींद भी टूट गई। सोमवार को तहसीलदार नदियों में निरीक्षण करने पहुंचे तो उनकी आंखों के सामने ही सैकड़ों बीघा क्षेत्र में खनन हो रहा था। टीम के पहुंचते ही माफिया इधर-उधर हो गए। इसके बाद तहसीलदार ने क्षेत्र के सभी दस पट्टों पर रोक लगा दी।
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रविवार सुबह करीब पांच बजे राजाजी पार्क की एसटीएफ ने पार्क से सटी मोहंड रौ और चिल्लावली नदी में छापा मारा था। इस दौरान सैकड़ों ट्रैक्टर ट्रालियों से खनन किया जा रहा था। इतनी बड़ी संख्या में खनन कर रहे माफिया एसटीएफ टीम पर हावी हो गए और जबरन ट्रैक्टर ट्राली छुड़ाकर ले गए। टीम केवल तीन ट्रैक्टर ट्राली पुलिस के हवाले कर पाई। टीम ने स्थानीय प्रशासन को मामले की रिपोर्ट भेजी तो सोमवार को प्रशासन को कदम उठाने को मजबूर होना पड़ा। लेकिन आश्चर्य की बात यह रही कि एसटीएफ की कार्रवाई का भी खनन माफिया पर खौफ दिखाई नहीं दिया। सोमवार तड़के फिर से इन्होंने जेसीबी की मदद से नदियों का सीना चीरना शुरू किया। सोमवार दोपहर तहसीलदार चित्र कुमार त्यागी नदियों में निरीक्षण करने पहुंचे तो सैकड़ों ट्रैक्टर ट्रालियां में खनन सामग्री भरी जा रही थी। उन्हें देखते ही माफिया भाग खड़े हुए लेकिन कार्रवाई कोई नहीं की गई। तहसीलदार चित्र कुमार त्यागी ने माना कि उनके पहुंचने पर खनन हो रहा था। इससे साफ हो रहा है कि पट्टेदार खनन करा रहा हैं। उसके बाद उन्होंने क्षेत्र के सभी दस पट्टों पर जांच होने तक खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया। कोई खनन करता पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

पार्क की कार्रवाई से कटघरे में पुलिस-प्रशासन
हरिद्वार। क्षेत्र की नदियों में अवैध खनन की शिकायतें वर्षों से ग्रामीण करते आ रहे हैं। लेकिन प्रशासन स्वीकृत पट्टों से खनन होने के सुर अलापता रहा है। लेकिन सच यह है कि रात होते ही जेसीबी और सैकड़ों ट्रैक्टर ट्राली नदियों में उतर जाती हैं। रविवार तड़के राजाजी के अधिकारियों ने छापा मारा तो अवैध खनन का मंजर साफ दिखाई दिया। पूरा घटनाक्रम अवैध खनन को लेकर पुलिस और प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर रहा है।
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घाड़ क्षेत्र की मोहंड रौ, चिल्लावाली सहित तमाम नदियों को खोदकर बनाए गए गड्ढे अवैध खनन की गवाही दे रहे हैं। नियमों के मुताबिक जिस नदी की तलहटी को पांच फीट से ज्यादा नहीं खोदा जा सकता। वहां माफिया ने 20 से 25 फीट गहरे तक नदियों की कोख को खोद डाला है। बावजूद इसके अवैध खनन की गवाही दे रही नदियों की यह हालत न तो पुलिस को दिखाई देती है और न तहसील प्रशासन को। यही नहीं एंटी माईनिंग टीम की ओर से भी कई बार क्षेत्र के स्टोन क्रशरों पर मानकों से अधिक खनन सामग्री स्टॉक पाए जाने पर करोड़ों रुपये का जुर्माने लगाया। तब भी प्रशासन की और से क्षेत्र में अवैध कारोबार के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाए। अब जबकि पार्क प्रशासन की एसटीएफ ने रविवार सुबह करीब पांच बजे सैकड़ों ट्रैक्टर ट्रालियों से हो रहे खनन को अपनी आंखों से देखा तो यह स्पष्ट हो गया कि माफिया रात होते ही खनन शुरू कर देता है और सुबह सूरज चढ़ आने तक जारी रहता है।

पता सभी को है, यही तो खनन का खेल है
रुड़की। पुलिस प्रशासन से लेकर शासन में बैठे आला अफसरों तक को यह पता है कि घाड़ क्षेत्र में खनन का खेल को किस तरह से अंजाम दिया जा रहा है। लेकिन पता होने के बाद इस खेल को मौन स्वीकृति दी जा रही है। यही खनन का सबसे बड़ा खेल है।
दरअसल, शासन की ओर से घाड़ क्षेत्र की नदियों में खनन का खेल खेलने के लिए ही खनन के पट्टे जारी किए जाते हैं। नियमानुसार यदि आवंटित पट्टों में ही खनन हो तब भी कोई परेशानी नहीं है। लेकिन जैसे हाथी के दांत दिखाने के और खाने के और होते हैं। ठीक इसी तरह खनन के पट्टों की आड़ में पट्टों की सीमांकन को छोड़कर माफिया नदियों में से सफेद सोना भरते हैं। खनन के पट्टों के रवन्ने के आधार पर नदियों से खोदा गया खनन यूपी और उत्तराखंड के शहरों में सप्लाई किया जाता है। ऐसे में खनन के पट्टे अवैध खनन की आड़ बन रहे हैं। यदि प्रशासन खनन के पट्टों पर रोक लगा दे या फिर प्रशासन ईमानदारी से इसकी मॉनिटरिंग करें तो यह धोखाधड़ी थम सकती है।
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