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करंट लगने से स्टोन क्रशर के मजदूर की मौत

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सुल्तानपुर क्षेत्र के बाड़ीटीप गांव में किशोर की मौत के बाद विलाप करते परिजन। - फोटो : ROORKEE
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टांडा महतोली गांव के निकट स्थित स्टोन क्रेशर पर रात के समय वहां काम करने वाले बाड़ी टीप गांव निवासी एक किशोर की करंट लगने से मौत हो गई। मौत के बाद मौके पर पहुंचे अन्य काम करने वाले लोग किशोर को उठाकर अस्पताल ले गए। जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। आरोप है कि साथ गए लोग किशोर का शव अस्पताल में छोड़कर फरार हो गए। अस्पताल में मौजूद एक परिचित ने परिजनों को घटना की जानकारी दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव का पंचनामा भरकर पीएम के लिए भेज दिया है।
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सुल्तानपुर क्षेत्र के बाड़ी टीप गांव निवासी किशोर जॉनी पुत्र सुरेंद्र (17) टांडा महतोली गांव के पास स्थित एक स्टोन क्रेशर में काम करता था। बताया जा रहा है कि मंगलवार को स्टोन क्रेशर में काम करते समय रात करीब 9 बजे जॉनी को बिजली का करंट लग गया। इसके चलते जॉनी की मौके पर ही मौत हो गई। यह देख आसपास काम कर रहे अन्य लोग मौके पर आए जॉनी को बेसुध पड़ा देखा तो उसे उठाकर सरकारी अस्पताल हरिद्वार ले गए। वहां पर डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिजनों का आरोप है कि जॉनी के शव को अस्पताल ले जाने वाले लोग उसे अस्पताल में ही छोड़कर चले आए। आरोप है कि स्टोन क्रेशर स्वामी या अन्य किसी कर्मचारी ने जॉनी के परिजनों को कोई सूचना तक नहीं दी। किशोर के परिजनों को अस्पताल में काम करने वाले एक परिचित ने मामले की जानकारी दी। तब जाकर परिजन सरकारी अस्पताल हरिद्वार पहुंचे और मामले की जानकारी 100 नंबर पर पुलिस को दी। इसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची। जॉनी की मौत की खबर सुनते ही गांव में मातम छा गया। सुल्तानपुर पुलिस चौकी प्रभारी लोकपाल परमार का कहना है कि मृतक के शव का पंचनामा भरकर पीएम कराया जा रहा है। मामले की तहरीर और पीएम रिपोर्ट आने पर जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।
मां और बहन का छिन गया इकलौता सहारा
सुल्तानपुर। जॉनी की मौत के बाद उसके परिवार का रोजी-रोटी कमाने का सहारा छिन गया है। जॉनी के बाद अब उसके परिवार में उसकी मां सविता और छोटी बहन नीलम ही बची हैं। जॉनी के पिता सुरेंद्र की बीमारी के चलते करीब आठ महीने पहले ही मौत हो गई थी। पिता की मौत के बाद जॉनी ने मेहनत मजदूरी कर किसी तरह बहन और मां का बोझ भार संभाला, लेकिन जॉनी की मौत के बाद अब इस परिवार पर फिर से दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
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