कुमाऊं क्षेत्र का लोक पर्व गमरा तीन दिन तक चले आध्यात्मिक आयोजन के साथ बुधवार को संपन्न हो गया। इस दौरान पारंपरिक वेशभूषाओं से सजे कुमाऊंनी क्षेत्र के लोगों ने लोक नृत्य और मंगल गीतों से माहौल को आध्यात्मिक बना दिया।
देर शाम भगवान शंकर और पार्वती की प्रतिमाएं गंगनहर में विसर्जित की गई। सभी ने भगवान शंकर और मां पार्वती से लोक कल्याण तथा सुख समृद्धि की कामना की।
कुमाऊंनी संस्कृति का लोक पर्व गमरा हर वर्ष कुमाऊंनी क्षेत्र के लोगों ने उल्लास के साथ मनाया। शिवाजी नगर में महादेव पांडे के निवास पर तीन दिन से चल रहे इस आयोजन के अंतर्गत कुमाऊंनी संस्कृति के अनेक रंग देखने को मिले। महादेव पांडे के अनुसार पौराणिक मान्यता के तहत भाद्रपद मास में यह लोक पर्व काफी महत्व रखता है। इसे लोग बड़े उल्लास के साथ मनाते हैं। इस दौरान महिलाएं और युवतियां पारंपरिक परिधान पिछोड़ा तथा नथ आदि पहनकर मांगल गीत गाती हैं। कुमाऊंनी संस्कृति के विशेषज्ञ देव सिंह सामंत ने सभी लोगों को गमरा की बधाई देते हुए उनके मंगलमय जीवन की कामना की। कार्यक्रम की संयोजिका नंदा एरी ने भी इस पर्व के महत्व के बारे में विस्तार से बताया। इस दौरान पंडित जय दत्त जोशी, रेखा जोशी, रोशन पांडे, हरीश पांडे, दीपक त्रिपाठी, शीला बिष्ट, भगवान सिंह, रमेश कांडपाल, गोविंद सिंह, सोनू, इंदर सिंह बिष्ट, अनिल जोशी, गोविंद, मदन मोहन जोशी, गीता पुजारा, तुलसी पांडे, बिंदु मेहता, मीना कठैत, पार्वती रावत, बसंती देवी, विजय सिंह पवार, जीवानंद बूड़ाकोटी, सतीश नेगी, गिरीश भट्ट, राजेंद्र सिंह रावत, सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।