रुड़की। भक्ति और आस्था के पथ को संगीतमय बनाने के लिए शिवभक्तों ने करोड़ों रुपये न्यौछावर कर दिए हैं। हाईवे पर विशाल कांवड़ के साथ भारी भरकम डीजे पर डेढ़ से ढाई लाख रुपये तक खर्च किए जा रहे हैं। यह तब है जबकि प्रशासन डीजे के खिलाफ लगातार सख्ती बरतने का दावा कर रहा है। बावजूद इसके साल दर साल कांवड़ के साथ डीजे का संयोग और क्रेज बढ़ता जा रहा है।
इन दिनों दिल्ली-हरिद्वार हाईवे पर भारीभरकम डीजे के साथ चल रहे कांवड़ियों का कब्जा है। एक के पीछे एक कर चल रही अनगिनत कांवड़ में एक से बढ़कर एक डीजे की धुन बज रही है। शिवभक्ति से सराबोर डीजे की धुन न केवल आसपास दुकानों के शीशों तक को हिला रही है। बल्कि पास से गुजरने वाले लोगों के दिलों की धड़कनों को भी तेज कर रही है। शिवभक्तों की मानें तो इस तरह की एक कांवड़ पर लगाए गए डीजे डेढ़ से ढाई लाख रुपये में सात दिन के किराये पर लाए गए हैं। ज्यादातर डीजे मेरठ क्षेत्र के शिवभक्तों के हैं। बताया गया है कि इस कांवड़ सीजन में अकेले मेरठ से ही दो सौ से अधिक डीजे शामिल हो चुके हैं। सोनकर समिति लालकुर्ती कैंट मेरठ की कांवड़ में शामिल अंकुश सोनकर, गोल्डी, रमन, चरण, राहुल, राजकुमार, अंशिल और राजकमल आदि ने बताया कि उन्होंने ढाई लाख में डीजे बुक कर रखा है। साथ ही एक लाख रुपये कांवड़ बनाने में खर्च हुए हैं। जिसका वजन एक क्विंटल 20 किलो है। कांवड़ सीजन रोजाना 200 से 250 कांवड़ के भारी भरकम डीजे लेकर गुजर रही हैं। ऐसे में पांच दिन का भी आकलन किया जाए तो औसतन डेढ़ लाख रुपये एक डीजे के किराये के हिसाब से यह राशि करीब 15 करोड़ बैठती है। वहीं इससे अधिक की धनराशि अपेक्षाकृत छोटी कांवड़ के साथ लगाए गए डीजे पर भी खर्च हो रही है।
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कांवड़ मार्ग पर डीजे कंप्टीशन
कांवड़ मार्ग पर कौन कितनी बड़ी कांवड़ लेकर चलेगा और किसके डीजे की धुन सबसे अधिक तेज और दिल को धड़काने वाली होगी। इस को लेकर न केवल शर्तें लगती हैं बल्कि कंप्टीशन भी होता है। यहां तक की मेरठ की कई समितियां उम्दा डीजे सिस्टम के आधार पर इनाम भी देती हैं। गाजियाबाद से भारी भरकम डीजे सिस्टम के साथ कांवड़ लेकर चले राजू भाई ने बताया कि उनके क्षेत्र से 20 से अधिक बड़ी कांवड़ यात्रा मार्ग पर हैं। वापस पहुंचने पर समितियों की ओर से किसी एक कांवड़ को विजेता घोषित कर इनाम भी दिया जाएगा।