रुड़की। शहर और देहात क्षेत्र में कोहरा असर दिखाने लगा है। रविवार रात से ही कोहरा छाने लगा था। कोहरा और ठंड से जनजीवन बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। सड़कों पर वाहन रेंगकर निकलते रहे और सुबह के समय घर से निकलने वालों को भारी दिक्कतों को सामना करना पड़ा। सबसे ज्यादा दिक्कत स्कूल छात्रों को हो रही है। सोमवार को दोपहर तक कोहरा छाया रहा। दोपहर बाद सूर्य देव के दर्शन हुए लेकिन धूप बेअसर रही। शाम के समय फिर ठंड से कंपकपी छूटी।
शहर और आसपास के क्षेत्रों में पिछले कुछ दिनों से ही ज्यादा ठंड पड़ रही थी। सुबह के समय हल्का कोहरा भी छा रहा था, लेकिन सोमवार को तो हद ही हो गई। सोमवार को ठंड के मारे लोगों का बुराहाल रहा। रविवार रात से घने कोहरे से पूरा क्षेत्र ढक गया था। कोहरा इतना घना था दस मीटर से आगे कुछ नजर नहीं आ रहा था। सोमवार सुबह के समय भी कोहरे का यही हाल था। सुबह से समय लोगों का बाहर निकलना मुश्किल हो गया। रात खुलने के बाद भी वाहनों की फाग लाइट जलानी पड़ी। वाहनों की रफ्तार बहुत धीमी थी। सुबह के समय जरूरी काम से निकलने वालों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। दोपहर के समय कोहरे का असर कम हुआ था। तो सूर्यदेव भी दिखाई देने लगे। लेकिन ठंड के आगे यह धूप बेअसर रही। ठंड की वजह से लोग अपने घरों से भी बाहर नहीं निकले। बाजार में भी ठंड के कारण सूनापन ही दिखाई दिया। बाजार भी देर ही खुले और जल्दी बंद हो गए।
---------
पहाड़ों पर बर्फ पड़ने के कारण आ रहा कोहरा
रुड़की। पहाड़ों पर बर्फ पड़ जाने से नमी मैदानी इलाकों में आ रही है। यह नमी ही कोहरा बन रही है। कोहरे से फिलहाल निजात मिलने की उम्मीद नहीं है। सर्दी के मौसम में पृथ्वी से निकलने वाली नमी ठंड और धूल के कणों की वजह से ऊपर नहीं जा पाती है। इसके अलावा पहाड़ों पर बर्फ पड़ जाने की वजह से नमी मैदानी इलाकों की ओर आ जाती है। जो कोहरे का रुप ले लेती है। एनआईएच के डायरेक्टर प्रो. राजदेव सिंह ने बताया कि कोहरे का कहीं पर ज्यादा और कहीं पर कम होने का कारण उसका मूवमेंट करना होता है। हवा आदि की वजह मोइस्चर मूवमेंट करता रहता है। इससे किसी क्षेत्र में ज्यादा मोइस्चर हो जाता है। इसलिए वहां पर ज्यादा कोहरा हो जाता है।