गेहूं की फसल को रतुआ रोग अपनी चपेट में ले रहा है। इस रोग से गेहूं की पत्ती पर पीले धब्बे पैदा हो रहे हैं। इससे धीरे-धीरे पूरा पौधा प्रभावित हो रहा है। ऐसे में गेहूं की फसल की उपज कम होने का डर किसानों को सताने लगा है।
कृषि विज्ञान केंद्र धनौरी के कृषि वैज्ञानिक डॉ. पुरुषोत्तम कुमार ने बताया कि गेहूं का पीला रतुआ एक कवक रोग है। जो नम वातावरण और तापमान बढ़ने पर तेजी से फैलता है। ऐसे में समय-समय पर किसानों को अपनी फसल का निरीक्षण करते रहना चाहिए। अगर यह लक्षण दिखाई दे तो तुरंत उपचार शुरू कर दें। रोग फैल चुका हो तो रसायनिक दवाओं का छिड़काव जरूर करें।
ऐसे करें रोग की पहचान-
- गेहूं के पत्तों पर पीले रंग की धारियां दिखाई देना।
- पत्तियों पर छोटे-छोटे चमकदार पीले रंग के दाने दिखाई देना।
- पत्तियों को छूने पर पीला पाउडर (हल्दी) जैसा पदार्थ हाथ में लगना।
- पत्तियों की गुणवत्ता कम होना।
ये हैं रोग से बचाव के उपाय-
- फसल का निरीक्षण करते रहें ताकि समय से रोग फैलने से बचा जा सके।
- फसल को आवश्यकतानुसार पानी दें, अधिक पानी देने से खतरा बढ़ जाता है।
- रासायनिक उपचार, प्रोपिकोनाजोल एक एमएल प्रति लीटर की दर से फसल पर स्प्रे करें।
- पौधे को संतुलित खाद, उर्वरक दें ताकि पौधे की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ सके।
खोली में शांतनु का स्वागत करते कांग्रेस कार्यकर्ता। -संवाद