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वर्षों बाद भी निर्धारित नहीं हो पाए आटो और ई-रिक्शा के रूट

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शहर में आटो व ई-रिक्शा की संख्या में लगातार बढ़ोतरी होती जा रही है। हाईवे से लेकर मुख्य मार्गों तक इनकी भरमार होने से लोग परेशान हैं। पुलिस व परिवहन विभाग वर्षों बाद भी इनके रूट निर्धारित नहीं कर पाया है। इस कारण जाम विकराल रूप धारण कर रहा है तथा दुर्घटनाएं भी बढ़ रही हैं।
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वर्तमान में करीब तीन हजार ई-रिक्शा व पांच सौ के करीब आटो व टेंपो जिले की सड़कों पर जाम का प्रमुख कारण बन रहे हैं। परिवहन विभाग में मात्र दो हजार के करीब ई-रिक्शा व 250 के करीब आटो व टेंपो पंजीकृत हैं। करीब 15 प्रतिशत ई-रिक्शा व आटो अनधिकृत रूप से संचालित किए जा रहे हैं। अधिकांश ई-रिक्शा चालकों के पास लाइसेंस तक नहीं हैं। परिवहन विभाग इनका रूट निर्धारण करने की बजाय रुड़की में 10 किमी के दायरे में संचालित करने की छूट दे रहा है, जिसका फायदा उठाकर इनका संचालन किया जा रहा है तथा बाजारों, मुख्य मार्गों से लेकर हाईवे तक नियमों को ताक पर रख इनका संचालन करने की छूट प्रदान की जा रही है। ट्रैफिक पुलिस भी इससे आंखें मूंदे है तथा रूट निर्धारित करने से किनारा करती रही है।
यहां लगा रहता है जाम
ई-रिक्शा, टेंपो व आटो के मनचाहे संचालन से मेन बाजार, रेलवे रोड, बीटी गंज, रामपुर चौक, रामनगर, बीएसएम चौक, हरिद्वार रोड, आर्मी चौक, लक्सर रोड व एसडीएम चौक में जाम लगा रहता है।
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दो वर्षों से कागजों में योजना
ई-रिक्शा व टेंपो के रूट निर्धारित करने की योजना दो वर्षों से ट्रैफिक पुलिस के कागजों तक सीमित है। योजना में प्रत्येक मार्ग की ई-रिक्शा व आटो की छत का कलर अलग करने का निर्णय लिया गया था। हाईवे पर इनका संचालन प्रतिबंधित किया गया था, लेकिन दो वर्षों बाद भी हो कुछ नहीं पाया है।
किराए में भी मनमानी
पूर्व में महानगर क्षेत्र में आने-जाने के लिए 10 रुपये प्रति सवारी किराया निर्धारित था, लेकिन अब किराया भी मनचाहा वसूला जा रहा है। यही नहीं, ई-रिक्शा व आटो चालक 20 से 50 रुपये तक वसूले जा रहे हैं।
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विक्रम और ई-रिक्शा के रूट जल्द निर्धारित करने की तैयारी है। कार्ययोजना तकरीबन तैयार है। शीघ्र ही इसे लागू किया जाएगा।
-एसके सिंह, एसपी देहात रुड़की
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