भाजपा की ओर से रुड़की को सांगठनिक दृष्टि से पृथक जिला तो बना दिया, लेकिन पार्टी आज तक इस जिले में कमल नहीं खिला पाई। पार्टी की ओर से जितने भी चुनाव सिंबल पर लड़े गए उनमें एक भी सीट उसके हिस्से में नहीं आई, जबकि पार्टी के हिस्से में नगर निकाय एवं विधानसभा की सीटें हरिद्वार की अपेक्षा अधिक आती हैं। इससे भाजपा रुड़की जिले में इस बार तीसरे चुनाव में जीत हासिल करने को बेचैन है।
भाजपा हाईकमान ने पार्टी की मजबूती के लिए हरिद्वार जिले को दो भागों में बांटा हुुआ है। इसके तहत रुड़की और हरिद्वार को अलग-अलग जिला बनाया गया है। रुड़की में छह विधानसभाएं (भगवानपुर, रुड़की, खानपुर, मंगलौर, झबरेड़ा और पिरानकलियर) शामिल की गई हैं। हरिद्वार जिले में पांच विधानसभाएं (हरिद्वार शहर, हरिद्वार ग्रामीण, रानीपुर, ज्वालापुर और लक्सर सीट) शामिल की गई हैं। वर्ष 2009 में बने रुड़की जिले के प्रथम जिलाध्यक्ष राजेश सैनी को बनाया गया था, लेकिन जिला बनने के बाद वर्ष 2012 में हुए चुनाव में पार्टी सभी छह सीटों पर हार गई थी। वर्ष 2013 में हुए नगर निकाय के चुनाव में भी पार्टी चारों खानें चित्त हुई। रुड़की नगर निगम समेत पार्टी मंगलौर नगर पालिका और लंढौरा नगर पंचायत में से एक भी सीट अपनी झोली में नहीं डाल पाई। सांगठनिक जिला बनने पर कई कार्यकर्ताओं को पदाधिकारी बनने का मौका तो मिल गया, लेकिन भाजपा को इसका कोई राजनीतिक लाभ नहीं मिला। इस बार पार्टी फिर छह विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ रही है, लेकिन अब देखना यह होगा कि उसके प्रत्याशी क्या गुल खिलाते हैं।
पंचायत चुनाव में भी मिली निराशा
वर्ष 2011 में हुए जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में पार्टी समर्थित एक प्रत्याशी जीत पाया था। बीते जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में भी पार्टी दो सीटों पर परचम लहरा पाई।
हरिद्वार में हर बार पार्टी जीती चुनाव
रुड़की से अलग होकर रह गया हरिद्वार जिला हर चुनाव में भाजपा की विजयी पताका लहराता रहा। वर्ष 2012 के चुनाव में पार्टी की ओर से हरिद्वार जिले में पांचों सीटों पर जीत दर्ज की। इसके अलावा वर्ष 2013 के नगर निकाय के चुनाव में पार्टी ने नगर निगम हरिद्वार एवं लक्सर नगर पंचायत के अध्यक्ष पद पर भी जीत दर्ज की।