रुड़की। रमसा (राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान) के तहत एलटी (माध्यमिक) शिक्षकों को दिए जा रहे 10 दिवसीय प्रशिक्षण में बड़ा झोल सामने आ रहा है। प्रशिक्षण में शामिल 478 शिक्षकों पर प्रत्येक पर विभाग ने 2955 रुपये खर्च करने के लिए दिए हैं। लेकिन उत्तराखंड माध्यमिक शिक्षक संघ का आरोप है कि प्रशिक्षण के बाद सभी शिक्षक अपने-अपने घरों को लौट रहे हैं। इससे जिला परियोजना विभाग मोटा पैसा बचा रहे हैं।
इन दिनों हाईस्कूल में हिंदी, अंग्रेजी और सामाजिक विज्ञान पढ़ाने वाले शासकीय और वित्तीय सहायता प्राप्त शिक्षकों को छह दिवसीय प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जबकि चार दिवस का प्रशिक्षण विद्यालय या अकादमिक केंद्र में दिया जा रहा है। रमसा की ओर से पहले बैच के 298 शिक्षकों को प्रशिक्षण 25 से 30 जून तक दिया गया। दूसरे बैच के 180 शिक्षकों का प्रशिक्षण एक जुलाई से छह जुलाई तक चल रहा है। इसके लिए एक शिक्षक पर सरकार की ओर से 2955 रुपये खर्च किया जा रहा है। इस हिसाब से इस प्रशिक्षण के लिए 14 लाख साढ़े 12 हजार रुपये मिला है।
इस संबंध में उत्तराखंड माध्यमिक शिक्षक संघ की जिला इकाई के अध्यक्ष डा. अनिल शर्मा और महामंत्री राजेश सैनी का कहना है सभी शिक्षक अपने घर से प्रशिक्षण केंद्र पहुंच रहे हैं। प्रशिक्षण के बाद शाम को सभी अपने घर चले जाते हैं। इसलिए एक समय का भोजन बच रहा है और आवास का पूरा पैसा भी बचाया जा रहा है।
इनसेट
मास्टर ट्रेनर पर सवाल
संघ पदाधिकारियों का कहना है कि सभी मास्टर ट्रेनर शासकीय स्कूलों से लिए गए हैं। जबकि अशासकीय वित्तीय सहायता प्राप्त विद्यालय का एक भी शिक्षक प्रशिक्षण के लिए नियुक्त नहीं किया गया। जो शिक्षक प्रशिक्षण दे रहे हैं उन्हें मात्र दो-चार साल का ही अनुभव है। जबकि अशासकीय स्कूलों के शिक्षकों को 20 से 30 वर्षों का अनुभव है। उनके बीच के सभी शिक्षक एक जैसे हैं। उनसे प्रशिक्षण दिलाने का कोई फायदा नहीं है। विषय एक्सपर्ट बाहर से बुलाए जाने चाहिए थे।
इनसेट
बिना संसाधन प्रशिक्षण का औचित्य नहीं
राजकीय शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष हरेंद्र सैनी प्रशिक्षण के औचित्य पर सवालिया निशान लगा रहे हैं। उनका कहना है कि स्कूलों मेें पर्याप्त भवन नहीं है। मानक के अनुसार शिक्षक नहीं और छात्रों की संख्या मानकों से तीन चार गुना ज्यादा हैं। अन्य संसाधन भी मुहैया नहीं है तो फिर प्रशिक्षण का फायदा क्या है।
कोट
14 शिक्षक रात को भी प्रशिक्षण केंद्र पर ठहर रहे हैं। उन सभी को रात का भोजन भी दिया जा रहा है। मास्टर ट्रेनर नियुक्त करने के लिए अशासकीय विद्यालयों से पूछा गया था लेकिन किसी ने हामी नहीं भरी। इसलिए सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को ट्रेनर रखा गया। व्यवस्था भी शिक्षक संभाल रहे हैं। सब कुछ पारदर्शिता से किया जा रहा है।
- डा. आराधना गुप्ता, जिला संदर्भ व्यक्ति रमसा।