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उत्साह के आगे फीके पड़े प्रतिबंध, देर रात तक आसमां रहा रोशन

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रुड़की। दीपावली पर पटाखों को लेकर प्रशासन की गाइडलाइन का लोगों पर कोई असर नहीं दिखा। आतिशबाजी के लिए तय की गई दो घंटे की समयसीमा से पहले और बाद तक पटाखों की आवाज गूंजती रही। वहीं, पटाखा दुकानदारों का कहना है कि भले ही देर रात तक पटाखे छुड़ाए गए हों, लेकिन इस बार कम कारोबार हुआ है।
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दीपावली पर प्रदूषण और कोरोना के मद्देनजर जिलाधिकारी की ओर से पटाखा छोड़ने के लिए गाइडलाइन जारी की गई थी। इसके तहत रात आठ से दस बजे के बीच ही आतिशबाजी होनी थी, लेकिन लोगों के उत्साह के आगे प्रतिबंध फीके पड़ गए और शहरवासियों ने देर रात तक पटाखे छोड़े। यही नहीं, शनिवार को दीपावली पर सुबह से ही पटाखों की गूंज सुनाई देने लगी थी। इसके बाद शाम छह बजते ही पटाखों का शोर भी बढ़ने लगा। रात नौ से दस बजे के बीच हर तरफ आसमान रंगीन दिखाई दिया। कई जगहों पर रात दो बजे तक पटाखों की गूंज सुनाई देती रही। इससे प्रदूषण का स्तर भी सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ गया। दूसरी ओर, पटाखा कारोबारियों का कहना है कि इस बार पिछली दीपावली के मुकाबले कम कारोबार हुआ है। पटाखा कारोबारी सुरजीत सिंह ने बताया कि कुछ दुकानदारों के यहां बड़ी मात्रा में पटाखे बिके हैं, जबकि अधिकांश दुकानदारों के यहां काफी कम बिक्री हुई है। अनुमान है कि रुड़की में इस बार पर ढाई से तीन करोड़ के पटाखे ही बिके हैं, जबकि पिछली दिवाली को पांच करोड़ से अधिक की बिक्री हुई थी। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट नमामी बंसल ने बताया कि लोगों पर काफी हद तक अंकुश लगाने का प्रयास किया गया है। सभी जगहों पर मॉनिटरिंग संभव नहीं थी। पॉश इलाकों में नजर रखी गई, जहां सीमित पटाखे छुड़ाए गए हैं। त्योहार के बाद जो भी पटाखा छोड़ेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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