करीब 24 वर्ष पहले क्षेत्र में एक घंटे में दो बसों की मिलती थी सेवा
झबरेड़ा। कस्बा झबरेड़ा में परिवहन विभाग की बसें संचालित न होने से क्षेत्र वासियों को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बस का ट्रायल के बावजूद भी समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। क्षेत्रवासी करीब 24 वर्षों से यातायात साधनों की बाट जोह रहे है। स्थानीय लोगों ने बताया कि झबरेड़ा क्षेत्र में करीब 24 वर्षों पहले सरकारी और निजी बसों का हर आधे घंटे में संचालन होता था। जहां एक रूट की बसें बीएचईएल हरिद्वार से चलकर रुड़की से पुहाना होते हुए झबरेड़ा से गुरुकुल नारसन तक पहुंचती थीं। वहीं इसी के साथ दूसरे रूट की बसें बीएचईएल हरिद्वार से रुड़की होते हुए मंगलौर और इकबालपुर से झबरेड़ा होते हुए देवबंद तक पहुंचती थीं। क्षेत्र के लोगों को एक घंटे में दोनों ओर से आधे घंटे की सेवा मिलती रहती थी लेकिन उत्तराखंड राज्य बनने के बाद इन दोनों रूटों की बसों का संचालन बंद हो गया है। इससे ग्रामीणों को मजबूरन टेंपो, रिक्शा या निजी वाहनों के माध्यम से आवागमन करना पड़ रहा है। झबरेड़ा से रुड़की आने के लिए दो टेंपो बदलने पड़ रहे हैं। पहला झबरेड़ा से इकबालपुर पहुंचता है और इकबालपुर से रुड़की का दूसरा टेंपो बदलना पड़ता है। रुड़की से झबरेड़ा के लिए दो बार बस ट्रायल हो चुका है। पहले विधायक देशराज कर्णवाल के कार्य काल में हुआ था और दूसरा विधायक वीरेंद्र जाती के मौजूदा समय में हुआ है, लेकिन बसों का संचालन नियमित नहीं हो पाया।
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झबरेड़ा क्षेत्र में परिवहन बसों के संचालन का मुद्दा विधानसभा तक उठाया गया है। परिवहन विभाग ने ट्रायल के लिए दो बसें चलाई। बसों के नियमित संचालन के लिए प्रयास जारी है। - वीरेंद्र जाती विधायक झबरेड़ा
बसों का संचालन न होने से रुड़की से झबरेड़ा जाने के लिए लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लोगों की सुविधाओं के लिए नियमित बसों का संचालन होना चाहिए। - अशोक कुमार पंवार
इकबालपुर झबरेड़ा क्षेत्र के लोग मजबूरी में टेम्पो में बैठकर यात्रा करने को मजबूर है। परिवहन की बसों का संचालन झबरेड़ा बेहद जरूरी है, ताकि ग्रामीणों को आवागमन में आराम मिल सके। चंकी कुमार
क्षेत्र में यातायात के साधनों का अभाव है। क्षेत्र में परिवहन विभाग की मिनी बसों का संचालन होना चाहिए़। क्षेत्र से अन्य जगहों पर जाने के लिए सवारी वाहन को ढूंढना पड़ता है। आदित्य चौधरी
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झबरेड़ा ग्रामीण क्षेत्र का व्यापारिक गढ़ माना जाता है। लेकिन यातायात साधनों के अभाव में व्यापारियों व ग्राहकों को आवागमन में भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। वंश