एक नवजात बच्ची की हालत बिगड़ने पर उसे एक नर्सिंगहोम में भर्ती कराया गया। आरोप है कि कर्मी की लापरवाही से इसके पांव की हड्डी टूट गई। नवजात के पिता ने मामले की रिपोर्ट गंगनहर कोतवाली में दर्ज करा दी है। चिकित्सक ने आरोपों को बेबुनियाद बताया है।
देवबंद के दीवालहेड़ी निवासी वर्णिक ने बताया कि उसकी पत्नी ने एक बच्ची को जन्म दिया था। समय से पहले जन्म होने पर नवजात की हालत बिगड़ गई। आनन-फानन में उसे 26 जनवरी को गणेशपुर स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। चिकित्सक ने अगले दिन परिजनों को बताया कि बच्ची के पांव में सूजन है। उसका एक्स-रे करना होगा। एक्स-रे में पता चला कि उसके पांव में फ्रैक्चर है। इस पर नवजात को रेफर कर दिया। परिजन नवजात को लेकर देहरादून स्थित एक अस्पताल में लेकर पहुंचे। वर्णिक का आरोप है कि जिस समय नवजात अस्पताल में भर्ती थी उस समय उठाने आदि में नर्सिंगहोम के कर्मी ने लापरवाही बरती है। जिससे उसके पांव में फ्रैक्चर आया है। गंगनहर कोतवाली पुलिस ने नवजात के पिता वर्णिक की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया है।
जिस समय नवजात उनके नर्सिंगहोम लाया गया था उसकी सांस तेज चल रही थी। ऑक्सीजन आदि लगा कर उसे नॉर्मल किया गया था। अगले दिन बच्ची के पांव में सूजन नजर आई तो उन्होंने एक्स-रे कराया। उसमें उसके पांव में फ्रेक्चर था। उसे यहीं भी ठीक किया जा सकता था, लेकिन बच्ची की किडनी में भी दिक्कत थी। इसलिए उसे हायर सेंटर रेफर किया गया था। कई बार जन्म के समय फ्रेक्चर हो जाता है। नर्सिंगहोम में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। यदि परिजनों को किसी प्रकार का संदेह है तो फुटेज देखी जा सकती है।
डा. अशंक ऐरन, बाल रोग विशेषज्ञ