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... तो पैदल चलने वाले के लिए भी अनिवार्य हो गया हेलमेट

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रुड़की। अपनी कार्यशैली को लेकर अक्सर चर्चाओं में रहने वाली सिटी पेट्रोल यूनिट (सीपीयू) पर एक बार फिर से सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि स्कूटी पैदल लेकर जा रहे युवक को सीपीयू ने रोक लिया। काफी जद्दोजहद पर डेढ़ घंटे बाद उसे छोड़ा गया। युवक का कहना है कि हेलमेट गायब होने से वह स्कूटी पैदल लेकर जा रहा था, लेकिन सीपीयू कर्मचारियों का दावा है कि युवक स्कूटी चलाकर जा रहा था। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि युवक बिना हेलमेट के स्कूटी चलाकर जा रहा था तो चालान क्यों नहीं किया गया और अगर पैदल स्कूटी ले जा रहा था तो उसे डेढ़ घंटे तक इंतजार क्यों कराया गया।
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सिविल लाइंस में व्यापारी पंकज जिंदल की इलेक्ट्रॉनिक की दुकान है। उन्होंने अमर उजाला को फोन कर बताया कि उनकी दुकान पर काम करने वाले 22 वर्षीय सुधांशु को एक अन्य व्यक्ति के साथ बृहस्पतिवार को लालकुर्ती में पेमेंट लेने के लिए स्कूटी से भेजा था। करीब आधे घंटे बाद सुधांशु का फोन आया कि दुकान से उनका हेलमेट गायब हो गया है। इस पर पंकज जिंदल ने उन्हें मिलिट्री चौराहे पर सख्त चेकिंग की हिदायत देते हुए कहा कि स्कूटी को पैदल लेकर वापस आएं। इसके बाद सुधांशु अपने साथी के साथ स्कूटी लेकर पैदल चल दिए। आरोप है कि मिलिट्री चौराहे पर सीपीयू ने उन्हें रोक लिया और चालान कटवाने को कहा।
इस पर सुधांशु ने पूरी कहानी बताई और जहां हेलमेट गायब हुआ, वहां बात करने को भी कहा। सुधांशु के अनुसार, सीपीयू कर्मियों ने बात करने से इनकार कर दिया। पंकज जिंदल ने बताया कि उन्होंने पुलिस अधिकारियों को पूरी घटना बताई और कहा कि सुधांशु पैदल स्कूटी लेकर आ रहे थे तो फिर चालान की कार्रवाई कैसे हो सकती है। इसके बाद भी सीपीयू ने करीब डेढ़ घंटे तक उन्हें रोके रखा और फिर बिना कार्रवाई के छोड़ दिया। वहीं, यातायात के प्रभारी निरीक्षक अकरम का कहना है कि पैदल चलने वाले का चालान नहीं किया जा सकता। हो सकता है कि वे स्कूटी चलाकर जा रहे हों, या फिर नाबालिग हों। मामले की जांच कराई जाएगी।
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