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जेल प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

Thu, 16 Mar 2017 10:20 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो रुड़की
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 जेल में बंद सुनील राठी हो या फिर कुख्यात अमित भूरा, सुशील गुर्जर, प्रवीण वाल्मीकि या फिर कोई अन्य। सभी अपराधी जेल से अपना नेटवर्क संचालित कर रहे हैं। कई बार मामला सामने आने के बाद भी जेल प्रशासन और शासन की चुप्पी सवाल खड़े कर रही है, इसका खामियाजा शहर के चिकित्सकों, व्यापारियों समेत अन्य लोगों को उठाना पड़ रहा है।       
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कुख्यात प्रवीण वाल्मीकि की ओर से रुड़की के एक डेयरी स्वामी से चौथ मांगने का मामला उजागर हुआ था। इसमें चमोली के तत्कालीन जेलर का मोबाइल फोन भी इस्तेमाल किया गया था। उसके बाद संबंधित जेलर को निलंबित कर मामले की इतिश्री कर ली गई। यही नहीं हाल ही में एक बार फिर चमोली जेल में बंद सुशील गुर्जर की ओर से मोबाइल के इस्तेमाल का मामला सामने आया था। इसमें उसके अपने भतीजे और हथियारों के सौदागर अमित चौधरी से संपर्क करने का खुलासा हुआ था। पुलिस ने अमित चौधरी को गिरफ्तार कर लिया था। अब पटियाला जेल से चिकित्सक को मिली धमकी के बाद एक बार फिर जेलों की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इससे पहले देहरादून, हरिद्वार, रुड़की सहित अन्य जेलों से कुख्यातों के मोबाइल इस्तेमाल करने के मामले सामने आते रहे हैं। इसके बावजूद जेल प्रशासन की ओर से सुधार के लिए कोई प्रयास नहीं किए गए हैं। स्थिति यह है कि रुड़की सहित उत्तराखंड की अधिकांश जेलों में आज भी जैमर तक नहीं लगाए गए हैं। यही नहीं जेलों के आधुनिकीकरण और चाक चौबंद सुरक्षा व्यवस्था के भी दावे हवाई साबित हो रहे हैं। दूसरी ओर जेल के अफसर चुप्पी साधे हुए हैं।
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