कालाबाजारी रोकने के लिए बायोमैट्रिक मशीनों के बजाय मोबाइल ऐप से उपभोक्ताओं को राशन वितरण की तैयारी की जा रही है। बायोमैट्रिक मशीनों के महंगे होने से खाद्य आपूर्ति विभाग विकल्प के रूप में मोबाइल ऐप का प्रयोग करने की सोच रहा है। इससे सस्ते बजट में बायोमैट्रिक जैसी व्यवस्था भी लागू हो जाए और खर्च भी अधिक न हो सके।
विभिन्न योजनाओं के तहत उपभोक्ताओं को सरकारी दुकानों से सस्ती दरों पर राशन मिलता है, लेकिन डीलर गड़बड़ियां कर उपभोक्ताओं का राशन कालाबाजारी की भेंट चढ़ा देते थे। अधिकारियों के तमाम प्रयासों के बावजूद सरकारी राशन की कालाबाजारी रुकने का नाम नहीं ले रही है। ऐसे में अब विभाग की ओर से राशन वितरण प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए ऑनलाइन गेहूं, चावल एवं कैरोसीन वितरण की व्यवस्था की तैयारी की जा रही है। इसके लिए उपभोक्ताओं से पूरे परिवार के आधार कार्ड लिए जा रहे हैं। जिससे बायोमैट्रिक मशीन में परिवार का कोई भी सदस्य अंगूठा लगाकर राशन खरीद सके, लेकिन अधिकारियों की मानें तो एक बायोमैट्रिक मशीन की कीमत 25 हजार के आसपास है।
इतनी कीमत में न तो डीलर ही मशीन खरीदेंगे और न ही विभाग के पास इतना बजट है। इसको देखते हुए विभाग की ओर से मोबाइल ऐप में बायोमैट्रिक मशीन का सॉफ्टवेयर डाउनलोड कर राशन वितरण करने का रास्ता निकाला जा रहा है। राशन डीलर अपने स्मार्ट फोन में बायोमैट्रिक मशीन का ऐप डाउनलोड कर मोबाइल में अंगूठा लगवाकर राशन बांटे सकेंगे। जिला खाद्य आपूर्ति अधिकारी आरके शर्मा ने बताया कि योजना को शासन से स्वीकृति मिल गई तो मई माह से इसका प्रयोग भी शुरू करा दिया जाएगा।