रुड़की। कूड़े से बिजली बनाने का प्रोजेक्ट प्रदेश सरकार में उथल-पुथल मचने के बाद राजनीति की भेंट चढ़ गया है। पूर्व विधायक प्रदीप बत्रा और मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव रहे राकेश शर्मा की दिलचस्पी वाले इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की फाइल अब शासन में गुम होकर रह गई है। यह तब है जबकि काफी ना-नुकूर के बाद नगर निगम ने 50 बीघा जमीन देने पर हामी भरने के बाद एमओयू पर साइन कर शासन को भी भेज दिया है। सूत्रों की मानें तो शासन ने अब इस प्रोजेक्ट को पूरी तरह ठंडे बस्ते में डाल दिया है।
गौरतलब है कि करीब एक वर्ष पहले शासन की ओर से रुड़की में जर्मन गैसीफिकेशन तकनीक से करीब 500 करोड़ की लागत से बनने वाले कूड़े से बिजली बनाने के प्रोजेक्ट को हरी झंडी दी थी। साथ ही निगम से जमीन मांगी गई थी। लेकिन निगम ने इस प्रस्ताव को बोर्ड की बैठक में लाकर जमीन के एवज में सालाना करीब एक करोड़ रुपये देने मांग की थी। लेकिन शासन की ओर से जनहित में जमीन देने के निर्देश के बाद आनन-फानन में निगम की ओर से प्रोजेक्ट की नोडल एजेंसी को जमीन देने के बाबत हामी भर दी थी। करीब तीन माह पहले नगर निगम ने इस बाबत एमओयू भी साइन कर दिया था। उम्मीद जताई जा रही थी कि जल्द रुड़की में इसका काम शुरू हो जाएगा। इस प्रोजेक्ट को शुरू कराने में कांग्रेस विधायक रहे प्रदीप बत्रा और मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव राकेश कुमार की बड़ी भूमिका थी। लेकिन जैसे ही कांग्रेस से बागी हुए विधायकों का प्रकरण सामने आया। तब से इस प्रोजेक्ट को ठंडे बस्ते में डालने की पटकथा लिखी जाने लगी। सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री से नजदीकी रखने वाले मेयर यशपाल राणा ने इस प्रोजेक्ट को ठंडे बस्ते में डालने में काफी हद तक भूमिका निभाई है।
जिलेभर का कूड़ा होता साफ, बनती बिजली
करीब एक साल पहले जिस समय शासन की ओर से इस योजना को मंजूरी दी गई थी तब इस योजना को लेकर सरकार ने कसीदे कसे थे। कहा था कि इससे जिले भर का कूड़ा तो निस्तारित होगा ही साथ ही पथ प्रकाश व्यवस्था आदि के लिए बिजली भी मिलेगी। यह प्रोजेक्ट देश में अपनी पहले तरह की योजना बताई गई थी।
इनका कहना है
इस प्रोजेक्ट के आगे नहीं बढ़ने का कारण यह है कि यह प्रोजेक्ट सरकार का था ही नहीं। यह प्रोजेक्ट पूर्व विधायक और प्रधानसचिव राकेश शर्मा का था। जिसे एक निजी कंपनी को दिया जाना था।
-- यशपाल राणा, मेयर नगर निगम रुड़की
इस प्रोजेक्ट को लेकर मैंने चार वर्ष मेहनत की थी। काफी जांच पड़ताल के बाद शासन से इसे मंजूरी मिली थी। प्रोजेक्ट को रोका जाना दुखद है। विकास कार्य राजनीति से ऊपर उठकर होने चाहिए।
-- प्रदीप बत्रा, पूर्व विधायक, रुड़की
हमने साइन किया हुआ एमओयू शासन को भेज दिया था। अब इसके बाद शासन से कोई जवाब नहीं आया है। शासन से जवाब मिलता तो जमीन की लीज और कंपनी से एग्रीमेंट का काम पूरा कराया जाएगा।
-- एचआर नौटियाल, रीजनल मैनेजर सिडकुल
प्रोजेक्ट के लिए नोडल एजेंसी बनाई गई सिडकुल को तीन माह पहले एमओयू साइन करके दे दिया था। लेकिन इसके बाद कोई जानकारी नहीं मिली कि प्रोजेक्ट के बारे में क्या चल रहा है।
-गोपाल सिंह चौहान, मुख्य नगर अधिकारी, नगर निगम