रुड़की (पिरान कलियर)। साबिर पाक के 751वें सालाना उर्स में हर साल की तरह इस बार भी बरेली शरीफ से झंडा मंगलवार को पिरान कलियर शरीफ पहुंचा। झंडा लेकर पहुंचे 120 अकीदतमंदों के पैदल जत्थे का शाह अली मंजर एजाज साबरी ने गर्मजोशी के साथ स्वागत किया। इसके बाद शाम को सज्जादा नशीन शाह मंसूर एजाज साबरी कुद्दूसी की सरपरस्ती में हजारों अकीदतमंदों की मौजूदगी में दरगाह साबिर के बुलंद दरवाजे पर झंडा कुशाई (फहराने) की रस्म अदा की गई।
शाह अली मंजर एजाज साबरी ने बरेली से 16 अक्तूबर को सूफी वसीम साबरी की सरपरस्ती में सूफी मेराज साबरी, माहिर बख्स, कमाल साबरी, शाहिद रजा नूरी, मक्की मियां, बाबा मिस्सी शाह, गुड्डू फरीदी, अबरार हनीफ समेत 120 अकीदतमंदों को झंडा लेकर पैदल रवाना किया था। 13 दिन का पैदल सफर तय करने के बाद जत्था मंगलवार को कलियर शरीफ पहुंचा। इससे पहले रास्ते में फतेहगंज, रामपुर, मुरादाबाद, नजीबाबाद, नहटौर, ज्वालापुर में जत्थे का लोगों ने स्वागत किया।
कलियर पहुंचने पर नायब सज्जादा नशीन शाह अली मंजर एजाज साबरी ने झंडा लेकर आए अकीदतमंदों का ढोल नगाड़ों और फूल मालाओं के साथ स्वागत किया। शाह अली मंजर एजाज साबरी ने बताया कि साबिर पाक के उर्स की पहली रस्म परचम कुशाई अकीदत और मोहब्बत के साथ सज्जादा नशीन शाह मंसूर एजाज साबरी की सरपरस्ती में अदा की गई। इस मौके पर शाह कासिफ एजाज, राजू फरीदी, शाह खालिक, शाह यावर, हाफिज मेराज, मुनव्वर अली, शाह राजी, नोमी मियां, असद मियां, शफीक साबरी, सूफी राशिद साबरी, शाह सुहेल, सूफी इसरार साबरी, डॉक्टर इनाम साबिर, मोजजन अब्दुस्लाम, समद साबरी मौजूद रहे।