आज आचार संहिता समाप्त हो रही है। इससे शहर से देहात तक रुके विकास कार्य फिर गति पकडे़ंगे। जिन योजनाओं पर ब्रेक लगा हुआ था उनकी राह भी नई सरकार बनते ही खुल जाएगी। दिल्ली हाईवे फोरलेन का निर्माण कार्य गति पकड़ेगा। गंगनहर पर पुल का निर्माण कार्य जल्द पूरा होने की उम्मीद है। एडीबी की ओर से शहर में बिछाई जा रही सीवर लाइन बिछाने का काम भी नई सरकार आने से शीघ्र पूरा होने की उम्मीद जग गई है।
आज 15 मार्च को आचार संहिता खत्म होने के बाद पुराने तहसीलदार आवास भवन में राजस्वकर्मियों के आवास निर्माण एवं तहसील में आपदा नियंत्रण भवन निर्माण की राह खुल जाएगी। इसके निर्माण के लिए शासन ने प्रथम किश्त के रूप में 30 लाख रुपये जारी कर दिए थे, लेकिन आचार संहिता के चलते टेंडर प्रक्रिया शुरू नहीं हो पा रही थी। अब टेंडर जारी होने पर काम शुरू हो जाएगा। इससे कर्मियों की आवासीय जरूरत पूरी हो जाएगी। आपदा नियंत्रण कक्ष बनने से आपदा के मद्देनजर होने वाले कार्य भी सुचारु रूप से शुरू हो पाएंगे। नई सरकार बनने से दिल्ली-हरिद्वार हाईवे के फोरलेन के अधूरे काम में तेजी आने की उम्मीद है। फिलहाल शासन ने फोरलेन निर्माण का काम पूरा करने का लक्ष्य मई माह निर्धारित किया गया है। काम में तेजी आने पर यह लक्ष्य पूरा हो सकेगा। शहर में धीमी गति से चल रही एडीबी की सीवर लाइन बिछाने का काम और गंगनहर पर पुल के निर्माण कार्य की धीमी रफ्तार भी लोगों की परेशानी बढ़ रही है।
अमल में आएगी कूड़े से बिजली बनाने की योजना
शहर में जर्मन गैसीफिकेशन तकनीकी से लगने वाले कूड़े से बिजली बनाने के प्लांट की योजना केंद्र सरकार की है। अब राज्य और केंद्र में एक ही पार्टी की सरकार होने से इसमें आ रहे अड़चनें दूर होने की उम्मीद है। हालांकि इस प्रोजेक्ट के लिए नोडल एजेंसी सिडकुल ने सालियर में भूमि चिह्नित कर ली है, लेकिन राजनीतिक कारणों के चलते यह प्रोजेक्ट शुरू नहीं हो पाया है।
आचार संहिता समाप्त होने के बाद राजस्वकर्मियों के आवास निर्माण एवं तहसील में बनने वाले आपदा नियंत्रण भवन के निर्माण के लिए टेंडर जारी किए जाएंगे। साथ ही रुकी हुई कई अन्य योजनाओं पर भी काम शुरू कराए जाएंगे।
मयूर दीक्षित, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रुड़की
निगम के निजीकरण को नई सरकार का इंतजार
ऊर्जा निगम की ओर से रुड़की सर्किल और ऊधमसिंह नगर सर्किल के निजीकरण को लेकर लंबे समय से कवायद चल रही है। इसके लिए टेंडर भी जारी किया जा चुका है, लेकिन सरकार की अस्थिरता के कारण इस पर निर्णय नहीं हो पाया है। ऊर्जा निगम के अधिकारियों के अनुसार अब नई सरकार आते ही निजीकरण पर मुहर लग सकती है।