रुड़की। अब सबके पास अपना राशन कार्ड होगा। शासन की ओर से जिलापूर्ति अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए हैं। पहले राशन कार्ड के लिए पांच लाख रुपये वार्षिक आय निर्धारित की गई थी। इससे जिले के करीब एक लाख परिवार राशन कार्ड के दायरे से बाहर हो गए थे। लेकिन अब इस बाध्यता को समाप्त करने से इन परिवारों को बड़ी राहत मिली है।
एपीएल राशन कार्डों में से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के पात्र परिवारों का चयन करने के बाद राज्य सरकार ने उत्तराखंड राज्य खाद्यान्न योजना शुरू की थी। योजना में एपीएल राशन कार्डधारकों के लिए पांच लाख रुपये वार्षिक आय निर्धारित की थी। इससे ऊपर आय वाले परिवारों को राशन कार्ड के दायरे से बाहर रखा गया था।
इससे योजना के दायरे में करीब एक लाख 55 हजार 819 परिवारों के कार्ड बनाए जाने के दायरे में आ रहे थे। लेकिन पांच लाख से अधिक आय वाले लगभग एक लाख छह हजार 61 परिवारों को राशन कार्ड नहीं दिए जाने थे। लेकिन अब नए शासनादेश के अनुसार पांच लाख रुपये वार्षिक आय की बाध्यता को समाप्त कर दिया गया है। इससे अब यह परिवार भी राशन कार्ड बनाकर सरकारी राशन ले सकेंगे।
आय प्रमाण की टेंशन भी हुई दूर
नए आदेशों से अब लोगों को आय प्रमाणपत्र नहीं देना पड़ेगा। पांच लाख रुपये से ऊपर आय वाले परिवारों के राशन कार्ड बनाए जाने से अब आय प्रमाण पत्र की कोई आवश्यकता नहीं पड़ेगी। अभी तक राशन कार्ड बनाए जाने के लिए अधिकारियों की ओर से आय प्रमाणपत्र या फिर आय का शपथपत्र मांगा जा रहा था, लेकिन अब इन दोनों से पीछा छूट जाएगा।
इनका कहना है
शासन की ओर से अब पांच लाख रुपये की वार्षिक आय को समाप्त कर दिया गया है। अब कोई भी परिवार राशन कार्ड बना सकता है। जो परिवार राशन कार्ड बनवाना चाहते हैं वह अपने दस्तावेजों के आधार पर राशन कार्ड बनवा सकते हैं। इसके आदेश समस्त अधिकारियों को भेज दिए गए हैं।
राहुल कुमार शर्मा, जिला खाद्य आपूर्ति अधिकरी, हरिद्वार
अधिकारियों की बढ़ेगी चुनौती
रुड़की। पांच लाख रुपये वार्षिक आय की बाध्यता खत्म करने से करीब एक लाख परिवारों को तो राहत मिल जाएगी लेकिन पहले से कछुआ गति से बन रहे राशन कार्ड बनने के काम में कार्डों की संख्या में एक लाख और बढ़ोतरी होने से अधिकारियों की चुनौती बढ़ जाएगी।
दरअसल विभाग की ओर से पहले 31 मार्च तक उत्तराखंड राज्य खाद्यान्न योजना के राशन कार्ड बनाने के आदेश जारी किए थे। लेकिन कार्ड बहुत कम बन पाए थे। उसके बाद विभाग ने कार्ड की समय सीमा 30 अप्रैल तक बढ़ा दी। लेकिन अधिकारियों के अनुसार मिले आंकड़ों पर नजर डालें तो अभी तक करीब 72 हजार राशन कार्ड ही बन पाए हैं। इनमें से महज 53 हजार कार्ड कंप्यूटराइज्ड हो पाए हैं। जबकि अब एक लाख कार्ड बढ़ने से अधिकारियों के सामने 30 अप्रैल तक सभी कार्ड बनाने की और बड़ी चुनौती आ गई है।