नोट बंदी के बाद मरीजों के जख्म पर मरहम लगाने के लिए प्रदेश सरकार की ओर से सरकारी अस्पतालों में 31 दिसंबर तक सभी जांचें निशुल्क करने की घोषणा हवाई साबित हो रही है। स्थिति यह है कि राजकीय संयुक्त चिकित्सालय में आज भी मरीजों और तीमारदारों से जांच के लिए निर्धारित शुल्क लिया जा रहा है। इस दौरान दो हजार रुपये के चेंज को लेकर भी आए दिन मरीजों और अस्पताल प्रबंधन को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
आठ नवंबर को एक हजार और पांच सौ रुपये के पुराने नोट बंद होने के बाद लोगों की परेशानियों को देखते हुए मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सरकारी अस्पतालों में 31 दिसंबर तक सभी जांच निशुल्क करने की घोषणा की थी। यही नहीं अस्पताल में रजिस्ट्रेशन पर्ची भी निशुल्क की जाने वाली थी, जिससे मरीजों को कुछ राहत मिल सके, लेकिन 22 दिसंबर बीतने के बाद भी मुख्यमंत्री के दावे हवाई साबित हो रहे हैं। मरीजों को सिविल अस्पताल में आज भी सभी जांचों के लिए निर्धारित शुल्क अदा करना पड़ रहा है। यही नहीं चेंज पैसे नहीं होने पर मरीजों को बैरंग लौटना पड़ रहा है।
दरअसल अस्पताल में 17 रुपये की पर्ची और 100-200 रुपये की जांच के लिए लोग हजार या फिर पांच सौ के पुराने नोट दे रहे थे। ऐसे में खुले पैसे नहीं होने के कारण अस्पताल प्रबंधन भी पुराने नोटों को स्वीकार नहीं कर रहा था। यही नहीं शहर में अभी अधिकांश नए नोट दो हजार रुपये के आ रहे हैं, जिसे चेंज करने में भी अस्पताल प्रबंधन को परेशानी आ रही है। इसे लेकर आए दिन मरीजों और स्वास्थ्य कर्मचारियों की फजीहत हो रही है। दूसरी ओर मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद भी मरीजों को लाभ नहीं मिलने से स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस संबंध में सिविल अस्पताल रुड़की के सीएमएस डा. संजय कंसल का कहना है कि विभाग की ओर से जो आदेश आया है, उसमें मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के कार्डधारक को ही निशुल्क जांच की सुविधा देनी है। मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत कार्ड धारक को पहले भी निशुल्क जांच की सुविधा थी।