राज्य गठन के बाद से कोई भी विधायक हैट्रिक नहीं लगा पाया है। हालांकि अविभाजित उत्तर प्रदेश में रुड़की विधानसभा से स्वतंत्रता सेनानी जगदीश नारायण सिन्हा और पूर्व मंत्री राम सिंह सैनी को तीन बार विधायक बनने का मौका मिला। यदि विधायक प्रदीप बत्रा को एक बार फिर मौका मिलता है तो राज्य गठन के बाद तीसरी बार विधायक नहीं बनने का मिथक टूट जाएगा। वहीं, दूसरी ओर अन्य सीटों पर बात करें तो लक्सर में भाजपा प्रत्याशी, भगवानपुर और कलियर में कांग्रेस प्रत्याशी जीते तो यह उनकी भी हैट्रिक होगी।
रुड़की विधानसभा में आजादी के बाद से स्वतंत्रता सेनानियों से लेकर कई बड़े दिग्गजों ने विधायकी संभाली। सबसे पहले रुड़की में 1950 दशक में दीनदयाल शास्त्री विधायक बने थे जो स्वतंत्रता सेनानी थे। इसके बाद फिर रुड़की की जनता ने स्वतंत्रता सेनानी जगदीश नारायण सिन्हा को लगातार तीन बार विधायक चुना हालांकि इनमें से एक चुनाव मध्यावधि था। इसके बाद भगवानपुर के सिकरौढ़ा निवासी राव मुश्ताक 70 के दशक में दो बार विधायक चुने गए। जबकि पूर्व गृह राज्य मंत्री राम सिंह सैनी को 1980, 1989 और 1996 के चुनाव में सफलता मिली और अविभाजित उत्तर प्रदेश में तीन बार विधायक बनने वाले वे दूसरी शख्सियत बने। वहीं, 1995 में रुड़की से काजी मोहियुद्दीन एक बार विधायक बने जबकि पूर्व मंत्री पृथ्वी सिंह विक्षित को 1991 और 1993 में दो बार विधायक बनने का मौका मिला। बात राज्य गठन के बाद की करें तो कोई भी विधायक हैट्रिक नहीं लगा पाया। 2002 और 2007 में सुरेश चंद जैन लगातार विधायक रहे लेकिन तीसरी बार हार गए। इसके बाद 2012 और 2017 में प्रदीप बत्रा विधायक बने। अब देखना होगा कि तीसरी बार उन्हें उनकी किस्मत कहां लेकर जाती है।