नारसन क्षेत्र में बढ़ती नीलगायों की संख्या किसानों के लिए बड़ी परेशानी बनती जा रही है। झुंड के रूप में खेतों में पहुंच रही नीलगायें फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रही हैं जिससे किसानों की मेहनत और आय दोनों प्रभावित हो रही है। किसानों का कहना है कि नीलगायें फसल खाने के साथ ही खेतों को रौंदकर भी बरबाद कर देती हैं।
क्षेत्र के किसान जितेंद्र, सुमित, भूरा, वसीम, राशिद और धर्मेंद्र ने बताया कि नीलगायों के डर से किसानों को दिन-रात खेतों की चिंता सताती रहती है। कई बार रात में भी खेतों की निगरानी करनी पड़ती है कि कहीं नीलगायों का झुंड फसलों को नुकसान न पहुंचा रहा हो। किसान संदीप, जयदीप, प्रमोद और प्रदीप का कहना है कि कई बार नीलगायों को भगाने के लिए खेतों में जाने पर वे निडर होकर हमला करने की कोशिश करती हैं जिससे किसानों में भय का माहौल है।
नीलगायों का आतंक केवल खेतों तक सीमित नहीं है। क्षेत्रवासियों के अनुसार सड़कों पर अचानक नीलगायों के आने से दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है। कई लोग हादसों का शिकार हो चुके हैं। नारसन क्षेत्र के बूढ़पुर जट्ट, ब्रह्मपुर जट्ट, मोहम्मदपुर जट्ट, खेड़ा जट्ट, नारसन कला, टिकोला कला, नारसन खुर्द, सकोती और नंगला कोयल सहित कई गांवों के जंगलों में बड़ी संख्या में नीलगाय देखी जा रही हैं। वहीं उत्तर प्रदेश सीमा से सटे उलहेड़ी परगना क्षेत्र में करीब 50 नीलगायों के दो बड़े झुंड किसानों के लिए सबसे बड़ी समस्या बने हुए हैं। किसानों ने प्रशासन से नीलगायों पर नियंत्रण के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।