ब्लैक मनी को खत्म करने के लिए बंद किए गए बड़े नोटों के बाद से राज्य में रुड़की के लोगों ने गूगल (इंटरनेट सर्च इंजन) पर ब्लैक मनी की जानकारी लेने में सबसे ज्यादा रुचि दिखाई है। नोट बंदी के अगले दिन यानी नौ नवंबर से 16 नवंबर के बीच गूगल की ओर से जारी ट्रेंड्स में यह आंकड़े सामने आए हैं। इसमें दूसरा स्थान रुद्रपुर और तीसरा स्थान हरिद्वार के लोगों का है।
1000 और 500 के पुराने नोटों पर पाबंदी के बाद से हर कोई यह जानना चाहता है कि आखिर कितनी और किस तरह की धनराशि ब्लैक मनी के दायरे में आती है। कोई यह भी जानना चाहता है कि ब्लैक मनी को कैसे सफेद किया जा सकता है। शायद इन्हीं सब सवालों के जवाबों के लिए लोग गूगल पर ब्लैक मनी टाइप करते होंगे। उसके बाद जो भी जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध होती है उसे पढ़ी जाती है। गूगल ट्रेंड्स पर जारी 9 से 16 नवंबर तक के ग्राफ के आंकड़ों पर गौर करें तो इस तरह की जानकारी लेने वालों में रुड़की के लोग सबसे आगे हैं। इसके अनुसार 100 परसेंटाइल के साथ रुड़की के लोग सबसे आगे हैं। जबकि रुद्रपुर दूसरे और 97 परसेंटाइल के साथ हरिद्वार तीसरे नंबर पर है। इसके अलावा हल्द्वानी का छठा, देहरादून का सातवां और नैनीताल के लोगों का आठवां स्थान है। आईटी विशेषज्ञों के अनुसार गूगल पर जारी ट्रेंड्स परसेंटाइल में होते हैं। इसमें सर्वाधिक आंकड़े वाले स्थान को 100 प्रतिशत माना जाता है। उसके सापेक्ष अन्य जगहों का आंकड़ा परसेंटाइल में व्यक्त किया जाता है। उसके आधार पर स्टेटीस्टिक ग्राफ और पहला, दूसरा नंबर तय किया जाता है।
गूगल एनालेटिक्स साफ्टवेयर से मिलते हैं ट्रेंड्स
आईटी एक्सपर्ट दीपक माथुर की मानें तो गूगल एनालेटिक्स साफ्टवेयर के जरिए गूगल प्रत्येक सर्च का रिकार्ड रखता है। इस साफ्टवेयर के जरिए किसी भी सर्च को निर्धारित समय के लिए आंकड़े जुटाए जाते हैं। यह साफ्टवेयर एक कमांड में बेहद कम समय में रिजल्ट देता है। यहां तक कि यह किसी भी शब्द को सर्च करते हुए अपने आप ही आपको विकल्प भी देता है। इस प्रकार एकत्र किए गए आंकड़े पूरी तरह से सही होते हैं।
गूगल के पास प्रत्येक क्षेत्र का आईपी एड्रस होता है। इसकी मदद यह डाटा एकत्र किया जाता है कि कहां कितना और क्या सर्च किया गया है। यहां तक की यह साफ्टवेयर यह अनुमान लगाने में भी सक्षम है कि आप आगे क्या सर्च करना चाहते हैं। इसके आधार पर गूगल ट्रेंड्स जारी किए जाते हैं।
प्रोफेसर प्रो. धर्मेंद्र सिंह, इलेक्ट्रानिक्स एंड कम्यूनिकेशन विभाग, आईआईटी रुड़की