- रुड़की की पूर्व शिक्षिका जरूरतमंद बच्चों को दे रहीं निशुल्क शिक्षा
- पौधरोपण और सामाजिक कार्यों में निभा रहीं सक्रिय भूमिका
मनव्वर हुसैन
रुड़की। शिक्षानगरी की नीलम शर्मा संघर्ष, आत्मनिर्भरता और मातृत्व की प्रेरणादायक मिसाल बनकर सामने आई हैं। पति और बेटे को खोने के गहरे दुख के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। आज वह भारत विकास परिषद अविरल गंगा और साहित्य अकादमी संगठन से जुड़कर समाज सेवा कर रही हैं। वह जरूरतमंद बच्चों को निशुल्क शिक्षा, स्टेशनरी और विद्यालयों को फर्नीचर उपलब्ध कराने के साथ पर्यावरण संरक्षण के तहत पौधरोपण अभियान भी चला रही हैं।
सिविल लाइंस के जादूगर रोड निवासी 60 वर्षीय नीलम शर्मा एमए इंग्लिश और बीएड हैं। उन्होंने आनंद स्वरूप आर्य सरस्वती विद्या मंदिर सीनियर सेकेंडरी स्कूल में इंग्लिश लेक्चरर के रूप में वर्षों तक सेवाएं दीं और 30 मार्च को सेवानिवृत्त हुईं। उनके पति विजेंद्र कुमार भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की से एमटेक मैकेनिकल थे और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड में डिप्टी मैनेजर पद पर कार्यरत थे।
1993 में व्यवसाय असफल होने से परिवार आर्थिक संकट में घिर गया, तब नीलम शर्मा ने घर से सिलाई और बुटिक का काम शुरू कर परिवार संभाला। वर्ष 2000 में उन्होंने शिक्षण कार्य शुरू किया और 2007 में आनंद स्वरूप आर्य सरस्वती विद्या मंदिर में नियुक्ति मिली।
19 अक्तूबर 2009 को पति की हार्ट अटैक से मृत्यु हो गई। इसके बाद उन्होंने ट्यूशन पढ़ाकर बेटों आदित्य दत्त और विश्वार्य दत्त की पढ़ाई जारी रखी। लेकिन 2 जून 2019 को सड़क हादसे में बड़े बेटे आदित्य दत्त (30) की मौत ने उन्हें झकझोर दिया। इसके बावजूद नीलम शर्मा ने खुद को संभाला और बेटे की स्मृति में आदित्य दत्त मेमोरियल फाउंडेशन चलाते हुए समाज सेवा के कार्यों में जुटी हुई हैं।