मंगलवार को जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 के हटाए जाने की खुशी में हिंदी साहित्योदय साहित्यिक संस्था की ओर से आयोजित काव्य गोष्ठी में कवियों ने राष्ट्रहित में एक से बढ़कर एक कविताएं पढ़ी। कवियों की राष्ट्रभक्ति में डूबी कविताओं ने श्रोताओं में जोश भर दिया।
बीएसएम चौक के समीप मंगलवार को हिंदी साहित्योदय साहित्यिक संस्था की ओर से कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस दौरान विनय प्रताप ने ‘नमो नमो बन गई धड़कन देश की, नमो नमो गाता हुआ हर एक सांस है’ गाकर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद सौ सिंह सैनी ने ‘ना कर तू पाप पाकरे, फल तेरे द्वार बरसना है, आज तुझे मालूम नहीं कल स्वाद तुम्हें ही चखना है’ सुनाकर जमकर तालियां बटोरी। डॉ. मधुराका सक्सेना ने पढ़ा कि ‘बहु प्रतीक्षित निर्णय का आज हुआ है पटाक्षेप, सबकी यही मनोकामना थी नहीं किसी पर कोई आक्षेप। रामशंकर सिंह ने पढ़ा कि ‘कश्मीर हिंद के मुकुट सृदृश, कुदरत ने सजाया है इसको, तीन सौ सत्तर, पैंतीस ए ने ही नर्क बनाया था इनको, छप्पन इंच सीने ने इतिहास कलंकित बदल दिया, इन धाराओं को हटा दिया, भू स्वर्ग का मार्ग प्रशस्त किया। इस दौरान हरि प्रकाश खामोश, दिनेश कुमार वर्मा, विनय प्रताप सिंह, देवेंद्र कुमार, श्रवण कुमार, डॉ. शालिनी जोशी पंत आदि मौजूद रहे।