सिविल लाइंस स्थित नगर निगम की दुकान को उसके वास्तविक मालिक को कब्जा दिलाने के लिए पहुंची टीम को लोगों ने घेर लिया। बताया जा रहा है कार्रवाई का विरोध कर रहे व्यक्ति ने भीम के कार्यकर्ताओं को अपने पक्ष में बुला लिया। मामला बिगड़ने के बाद टीम बिना बिना कार्रवाई बैरंग लौट गई।
रुड़की निवासी परमानंद को नगर निगम ने करीब 30 साल पहले किराये पर दुकान आवंटित की थी। कई सालों से इस पर उनके भाई भूपेंद्र का कब्जा था। एक साल पहले इस दुकान को एक किसान नेता को बेच दिए जाने का मामला सामने आया। इसके बाद निगम ने किसान नेता पर प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इस पर किसान नेता ने पूरे प्रकरण से पल्ला झाड़ लिया। अब नगर निगम के रिकाॅर्ड में दर्ज दुकान का मूल स्वामी परमानंद अपने भाई भूपेंद्र से कब्जा दिलाने की मांग कर रहा है।
नगर निगम ने जांच समिति का गठन किया था। जांच समिति ने परमानंद को दुकान का कब्जा दिलाने की सिफारिश की थी। इसी बीच भूपेंद्र कोर्ट में चले गए लेकिन स्थगन आदेश नहीं मिला। नगर आयुक्त गोपाल राम बिनवाल ने स्थगन आदेश नहीं मिलने के स्थिति में सोमवार को नगर निगम की टीम को दुकान का कब्जा हटाकर परामनंद को सौंपे जोन के आदेश दिए। इस पर निगम की टीम जैसे ही दुकान पर पहुंची। वहां पहले से ही भूपेंद्र और उसके पक्ष के लोग और भीम आर्मी के लोग मौजूद थे। भूपेेंद्र का कहना था कि यह उनका और उनके भाई के बीच का विवाद है जबकि निगम जबरन दुकान पर कब्जा दिलाने की कोशिश कर रहा है। इस दौरान भीड़ ने टीम को घेर लिया।
यह मामला कई दिनों से चर्चा में है। पिछले दिनों जिलाधिकारी ने भी इस मामले की जानकारी ली थी। एक पक्ष कोर्ट भी चला गया है। बावजूद इसके निगम अधिकारियों ने इसे हल्के में लिया और बिना पुलिस सुरक्षा के टीम मौके पर पहुंच गई।
नगर निगम की टीम मूल आवंटी परमानंद को कब्जा दिलाने गई थी। कर अधीक्षक भी मौके पर थे। दूसरे पक्ष ने उन्हें घेर लिया और भीम आर्मी के कार्यकर्ता भी विरोध में पहुंच गए। हंगामे के कारण टीम को लौटना पड़ा। अब पुलिस की सहायता से नियमानुसार कब्जा दिलाया जाएगा।- गोपाल राम बिनवाल, नगर आयुक्त