नरसिंह और हाकम के परिवार के लिए बृहस्पतिवार की रात काली साबित हुई। हादसे में दोनों घरों के युवक असमय काल के गाल में समा गए। हादसे में जान गंवाने वाले मेहताब की दो साल पहले ही शादी हुई थी। उसका आठ माह का एक बेटा है। वहीं नवीन अपने पिता का एकमात्र सहारा था। हादसे में वह सहारा भी छिन गया। हादसे के बाद दोनों घरों में मातम पसरा हुआ है।
बृहस्पतिवार देर रात को लक्सर-रुड़की मार्ग पर हुए हादसे में जान गंवाने वाले दोनों युवक साधारण आर्थिक स्थिति वाले परिवारों से हैं। मेहताब के पिता हाकम और नवीन के पिता नरसिंह दोनों मेहनत मजदूरी करते हैं। मेहताब और नवीन भी मेहनत मजदूरी करते थे।
बृहस्पतिवार को भी वह दोनों रोजी कमाने के लिए घर से निकले थे। उस समय परिजनों को पता भी नहीं होगा कि अब वह उन्हें दोबारा नहीं देख सकेंगे। नवीन के परिवार में माता-पिता के अलावा दो छोटे भाई-बहन हैं। नवीन मजदूरी कर अपने परिवार चलाने में अपने पिता का हाथ बंटाता था जबकि मेहताब के परिवार में माता-पिता के अलावा दो बड़े और दो छोटे भाई हैं।
दो साल पहले ही उसकी शादी हुई थी। उसका एक आठ माह का बेटा भी है। हादसे की सूचना मिलने के बाद ही दोनों परिवारों में कोहराम मच गया था। पोस्टमार्टम के बाद शुक्रवार को दोनों शवों का गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया। शनिवार को भी दोनों घरों में मातम पसरा रहा। दोनों परिवारों के लोगों को रो-रो कर बुरा हाल रहा। इस दौरान ग्रामीण भी गमगीन नजर आए।