मनरेगा योजना के तहत लगाए गए करीब 50 लाख रुपये के सामान का फर्जी तरीके से भुगतान करने के मामले में मनरेगा लोकपाल ने तत्कालीन दो खंड विकास अधिकारी और लेखाकार की सेवा पुस्तिका में प्रतिकूल प्रविष्टि दर्ज करने की संस्तुति की है। मामले में लापरवाही बरतने पर मनरेगा कंप्यूटर ऑपरेटर और उपकार्यक्रम अधिकारी को अंतिम चेेतावनी जारी की गई है। यह भी संस्तुति की गई है कि यदि दोनों दोबारा ऐसी लापरवाही करते हैं तो बिना चेतावनी सेवाएं समाप्त कर दी जाएं।
शिवदासपुर उर्फ तेलीवाला निवासी आकाश सैनी ने 22 दिसंबर 2021 को जिला विकास अधिकारी को पत्र भेजकर रुड़की ब्लॉक में मनरेगा के तहत हुए करीब 50 लाख रुपये के काम में फर्जी तरीके से भुगतान किए जाने की शिकायत की थी। शिकायत के आधार पर मनरेगा लोकपाल मिथलेशन ने जांच शुरू की। उन्होंने मनरेगा उप कार्यक्रम अधिकारी अंजली और मनरेगा लेखाकार मुनेश कुमार चौहान से स्पष्टीकरण मांगा। अपने स्पष्टीकरण में उपकार्यक्रम अधिकारी ने आईडी जनरेट नहीं होने की समस्या बताते हुए कंप्यूटर ऑपरेटर दीक्षित कुमार को जिम्मेदार ठहरा दिया था। जबकि लेखाकार ने पोर्टल पर पूरी जानकारी नहीं दिख पाने, गलती कंप्यूटर ऑपरेटर की होने और भुगतान बीडीओ के आदेशानुसार किए जाने की बात कही थी।
अंत में जांच में सामने आया कि वर्ष 2016 से अब तक किए गए भुगतान एक ही मद में दिखाए गए हैं। मामले में अधिकारियों की ओर से भी घोर लापरवाही की गई है। ऐसे में उन्होंने मनरेगा कंप्यूटर ऑपरेट दीक्षित कुमार और उपकार्यक्रम अधिकारी अंजली को लिखित चेतावनी जारी की। साथ ही दोबारा लापरवाही होने पर बिना चेतावनी सेवा समाप्त करने की संस्तुति भी की गई है। वहीं, भुगतान की जिम्मेदारी बीडीओ और लेखाकार की थी। जांच में दोनों दायित्व का उल्लंघन करते पाए गए। दोनों की सेवा पुस्तिका में प्रतिकूल प्रविष्टि की संस्तुति की गई है। डीडीओ वेद प्रकाश का कहना है मनरेगा लोकपाल की रिपोर्ट मिली है। अब विभाग की ओर से नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।