शीघ्र ही बच्चों के बैंक खाते में आरटीजीएस से स्कॉलरशिप की राशि जमा होगी।
मनरेगा मजदूरों को अब मजदूरी के लिए पंचायत जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
केंद्र सरकार ने मजदूरों को राहत देते हुए भुगतान के लिए अलग से खाता खोल दिया है। इसमें मजदूरों की दिहाड़ी तीन दिन में ही पहुंच जाया करेगी।
केंद्र सरकार की ओर से चलाई जा रही मनरेगा योजना में ग्रामीणों को एक साल में सौ दिन का रोजगार गांव में देने का प्रावधान है। जिले में फिलहाल मनरेगा में 174687 मजदूर पंजीकृत हैं। इनमें से 38160 मजदूर लगातार मनरेगा के तहत काम कर रहे हैं। लेकिन दिहाड़ी के लिए इन्हें पंचायत जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के चक्कर काटने पड़ते हैं।
इसके पीछे अधिकारी कारण बताते हैं कि केंद्र सरकार राज्य को मनरेगा मटीरियल एवं मजदूरों का पैसा एक ही एकाउंट में जारी करता है। उसके बाद राज्य सरकार मटीरियल एवं मजदूरी का पैसा अलग-अलग कर मजदूरों के खातों में भेजता है। इस प्रक्रिया में देर हो जाती है। जिसकी वजह से मजदूरों को मजदूरी देने में दो से तीन महीने का समय लगता है।
समय से दिहाड़ी न मिलने पर लोग अब मनरेगा में काम करने से कतरा भी रहे हैं। इसी को देखते हुए केंद्र सरकार ने मजदूरों को राहत देने के लिए राज्यस्तर पर अलग मजदूरी का बैंक एकाउंट खोल दिया है। इस खाते में केंद्र सरकार केवल दिहाड़ी का पैसा रखेगी। इस पहल से अब मजदूरों को एक सप्ताह से 15 दिन की मजदूरी कंप्यूटर में फीड होते ही तीन दिन बाद मिल जाया करेगी।
मजदूरी का खाता अलग होने से अब मजदूरों को जल्द भुगतान मिल जाया करेगा। इससे मनरेगा के कार्यों में तेजी आने से गांवों का विकास होने के साथ ही ग्रामीणों की काम में दिलचस्पी बढ़ेगी।
- सोनिका, सीडीओ, हरिद्वार