आम उपभोक्ता को ऊर्जा निगम छह महीने से ज्यादा समय के लिए अस्थायी कनेक्शन नहीं देता है, लेकिन क्षेत्र स्थित एक ग्लास फैक्टरी में 13 साल से अस्थाई कनेक्शन चल रहा है। पिटकुल के एमडी दीपक रावत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कांट्रेक्ट एंड परचेज विभाग (सीएंडपी) से स्पष्टीकरण तलब किया है। साथ ही पूछा है कि इतने साल से फाइल दबाने और टेंडर जारी नहीं करने के पीछे कौन अधिकारी जिम्मेदार हैं। उन्होंने मामले की जांच शुरू करने के साथ अविलंब स्थायी कनेक्शन के लिए टेंडर जारी करने के आदेश दिए हैं।
क्षेत्र स्थित एक ग्लास फैक्टरी को अक्तूबर 2008 में स्थायी कनेक्शन दिया जाना था। हालांकि, लाइन बिछाने से पहले ही कंपनी ने अधिकारियों पर अपना प्रभाव बनाकर रुड़की से लक्सर जा रही 132 केवी लाइन पर टी प्वाइंट बनाकर अस्थाई कनेक्शन ले लिया था। पिटकुल अधिकारियों ने भी ग्रिड कोड के नियमों को ताक पर रखकर अस्थायी कनेक्शन दे दिया था। स्थायी कनेक्शन के लिए मंगलौर से फैक्टरी तक लाइन बिछाने का काम शुरू किया गया तो ग्रामीणों ने विरोध कर दिया। इसके बाद करीब दस साल तक मामला ठंडे बस्ते में पड़ा रहा। दस साल बाद अधिकारियों ने निर्णय लिया कि पिटकुल का सी एंड पी विभाग रुड़की से लक्सर जा रही 132 केवी लाइन पर कंपनी में एक स्विचिंग सब स्टेशन बनवाएगा।
वर्ष 2018-19 में विभाग ने अस्थायी कनेक्शन को स्थायी बनाने के लिए दूसरे चरण की प्रक्रिया शुरू की। इसके तहत सी एंड पी को लाइन इन लाइन आउट (लीलो) प्रक्रिया के तहत कंपनी में स्विचिंग सब स्टेशन बनाने का काम दिया गया। सी एंड पी ने इस काम के लिए जो टेंडर निकाला, उसकी शर्तें इतनी कठिन थीं कि किसी ठेकेदार ने टेंडर नहीं लिया। लिहाजा यह टेंडर स्क्रैप हो गया। इसके बाद अधिकारियों ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। ऐसे में यह सवाल भी उठा कि अधिकारियों ने नियमानुसार टेंडर की जटिलताओं को दूर कर फिर से टेंडर निकालने में दिलचस्पी क्यों नहीं दिखाई। इस घटना को भी करीब तीन साल होने वाले हैं। ऐसे में पहला सवाल यह है कि किसी कंपनी को 13 सालों तक अस्थायी कनेक्शन कैसे दिया जा सकता है। दूसरा सवाल यह है कि ग्रिड कोड का उल्लंघन कर कंपनी को 132 केवी लाइन से सप्लाई कैसे दी गई। वहीं, पिटकुल के एमडी दीपक रावत का कहना है कि मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं। साथ ही सी एंड पी विभाग से स्पष्टीकरण तलब किया गया है।
नहीं लिया कोई दूसरा विकल्प
किसी भी बड़ी कंपनी में लाइन बिछाने के लिए सर्वे किया जाता है। यह देखा जाता है कि बिजलीघर से कंपनी तक लाइन किस मार्ग से आसानी से जाएगी। इस सर्वे में कम से कम पांच विकल्प लिए जाते हैं ताकि एक फेल होने पर दूसरा इस्तेमाल किया जा सके, लेकिन ग्रामीणों के विरोध से जब पहला विकल्प काम नहीं आया तो अन्य विकल्पों को अमल में ही नहीं लाया गया।
ऐसे बाहर आया 13 साल पुराना जिन्न
दरअसल, वर्षों से चल रहे अस्थायी कनेक्शन को मानो अधिकारी भूल गए थे। सूत्रों के अनुसार, कंपनी को नई यूनिट के लिए अपने कनेक्शन से नई लाइन डलवाने की जरूरत पड़ी। कंपनी ने जैसे ही इसके लिए आवेदन किया तो 13 साल पुराना जिन्न फिर से बाहर आ गया।