फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

धर्म और जाति के नाम पर एकता और अखंडता खत्म करना चाहती है सरकार

विज्ञापन
विज्ञापन
मंगलौर। नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध में सोमवार को मंगलौर में जन सैलाब उमड़ पड़ा। राजनीतिक पार्टियों के नेताओं के साथ धर्मगुरु और अन्य संगठनों के लोगों ने कहा कि सीएए किसी के भी हित में नहीं है, इसलिए सरकार को जन भावनाओं का सम्मान करते हुए इस कानून को वापस लेना चाहिए। कहा कि केंद्र सरकार अपने एजेंडे की खातिर देश को बांटना चाहती है, जिसे देश की जनता कभी भी स्वीकार नहीं करेगी।
विज्ञापन

इस मौके पर विधायक काजी निजामुद्दीन ने कहा कि सरकार देश को बांटने का काम कर रही है। हिंदू को मुसलमान से दूर करने का काम कर रही है, जिसमें वह कभी सफल नहीं होगी। उन्होंने कहा कि देश में लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं, लेकिन सरकार की आंख नहीं खुल रही है। भाजपा धर्म और जाति के नाम पर देश की एकता और अखंडता को खत्म करने का प्रयास कर रही है, लेकिन जनता इसे भलीभांति समझ रही है। बसपा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. शमशाद ने सीएए को काले कानून की संज्ञा दी। उन्होंने कहा कि यह कानून देश को तोड़ने वाला है, जबकि भारत एकता में अनेकता का नाम है। उन्होंने कहा कि देश में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर कुछ स्थानों पर अत्याचार हुए हैं, जिसकी जितनी निंदा की जाए उतनी कम है। पूर्व विधायक हाजी सरवत करीम अंसारी ने सभी लोगों से शांति व भाईचारा बनाए रखने की अपील की। उन्होेंने कहा कि सरकार का यह बांटने वाला कानून है, लेकिन हमें एक होकर इसके खिलाफ लड़ना है। हम हिंदू मुसलमान सिख ईसाई सभी लोग इस काले कानून की घोर निंदा करते हैं। मौलाना सिब्ते हसन ने कहा कि मैंने जीवन काल में नहीं देखा कि पाकिस्तान या बांग्लादेश से आकर कोई व्यक्ति यहां पर आबाद हुआ हो। उन्होंने कहा कि विभाजन के समय जिन लोगों को पाकिस्तान जाना था, वे चले गए और जिन्हें हिंदुस्तान में रहना था। उन्होंने हिंदुस्तान को चुना। भीम आर्मी के प्रदेश अध्यक्ष महक सिंह ने कहा कि यह कानून केवल मुसलमानों के लिए नहीं बल्कि इससे हिंदू मुसलमान, दलित, सिख सभी लोग प्रभावित होंगे। कार्यक्रम के मुख्य संयोजक मुफ्ती मासूम कासमी ने कहा कि केंद्र सरकार ने महंगाई, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, आर्थिक मंदी से ध्यान भटकाने के लिए नागरिकता संशोधन कानून को हड़बड़ाहट में लागू किया है। आसाम में एनआरसी लागू किया गया, वहां 19 लाख से अधिक लोग बाहर हो गए। उनमें वे लोग भी शामिल हैं, जिन्होंने देश की सेवा की है, इसलिए मुसलमान हिंदू सभी लोग इस बिल की घोर आलोचना कर रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें