क्षेत्रवासियों को जल्द लो-वोल्टेज और बिजली कटौती से निजात मिलने वाली है। रुड़की क्षेत्र के भलस्वागाज में प्रदेश का सबसे बड़ा सोलर प्लांट बन रहा है। मार्च में यह प्लांट बनकर तैयार हो जाएगा।
चुड़ियाला-झबरेड़ा मार्ग पर भलस्वागाज बिजली सब स्टेशन से जुड़े बिंडूखड़क, बालूपुर, सुन्हेटी, कुंजाबहादुरपुर सहित अन्य स्थानों पर लगभग 1600 बीघा क्षेत्रफल में सोलर पावर प्लांट का निर्माण किया जा रहा है। तीन माह पहले शुरू हुए प्लांट का 40 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। मार्च के अंत तक इसे पूरा करने का अनुबंध किया गया है। एक विदेशी कंपनी और राज्य सरकार के बीच 25 साल के लिए हुए अनुबंध के तहत पावर प्लांट का कार्य जोरशोर से चल रहा है। एक ही कंपनी की ओर से अलग-अलग टेंडर के तहत 60 मेगावाट क्षमता का सोलर पावर प्लांट स्वीकृत है। यह उत्तराखंड का सबसे बड़ा प्लांट बताया जा रहा है। निर्माणदायी संस्था के प्रतिनिधियों के अनुसार 31 मार्च तक निर्माण कार्य पूरा कर उत्पादन शुरू हो जाएगा। प्लांट से बनने वाली बिजली भलस्वागाज बिजलीघर के माध्यम से ग्रिड को दी जाएगी, इसके बाद उत्तराखंड पावर कार्पोरेशन इसे बांटेगा। ऊर्जा निगम के अधिशासी अभियंता अंकित जैन के अनुसार 60 मेगावाट क्षमता का पावर प्लांट बनने से न सिर्फ विकास कार्यों को बल मिलेगा, बल्कि क्षेत्र की बिजली आपूर्ति भी बेहतर होगी।
सोलर पावर को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं। इसके तहत भलस्वागाज सहित अन्य स्थानों पर सोलर पावर प्लांट स्वीकृत किए गए हैं। 12.5 मेगावाट से अधिक का सोलर पावर प्लांट स्वीकृत नहीं किया जा सकता लेकिन, अलग-अलग टेंडर में एक ही फर्म को कई प्लांट स्वीकृत किए जा सकते हैं।
........सीपी अग्रवाल, उपमुख्य परियोजना अधिकारी उत्तराखंड
अन्य स्थानों पर भी लग रहे प्लांट
झबरेड़ा, मंगलौर और भगवानपुर क्षेत्र में छोटे-छोटे दर्जनों सोलर पावर प्लांट लगाए जा रहे हैं जो ऊर्जा प्रदेश का सपना साकार करने में मददगार साबित हो सकते हैं। अधिकारियों के अनुसार सोलर पावर को प्रोत्साहित करने के लिए 500 किलोवाट तक का प्लांट लगाने पर सरकार की ओर से सब्सिडी दी जा रही है।
मंगलौर में 15 करोड़ से बनेगा नया बिजलीघर
ऊर्जा निगम की योजना सफल हुई तो जल्द मंगलौर और आसपास के क्षेत्रों को लो-वोल्टेज और कटौती की समस्या से राहत मिलेगी। क्षेत्र की समस्या को देखते हुए निगम की ओर से मंगलोर-झबरेड़ा मार्ग पर 15 करोड़ से अधिक की लागत से नए बिजली घर का निर्माण किया जाना है,इसका बजट स्वीकृत होने के बाद टेंडर की प्रक्रिया चल रही है। फरवरी से इस पर कार्य शुरू कर दिया जाएगा, जो अगले नौ माह में पूर्ण होना है।
मंगलौर के अलावा लिब्बरहेड़ी, कुरड़ी, नारसन और आसपास के क्षेत्रों में बिजली कटौती और लो-वोल्टेज की समस्या आम है। आए दिन हजारों उपभोक्ताओं को कटौती की मार से दो चार होना पड़ता है। समस्या के समाधान के लिए ऊर्जा निगम लंबे समय से भूमि की तलाश कर रहा था। भूमि चिह्नित होने के बाद अब 66/33 केवि बिजली घर निर्माण की कवायद शुरू कर दी गई है। ऊर्जा निगम अधिकारियों के अनुसार इस बिजलीघर के निर्माण से न सिर्फ क्षेत्र की बिजली समस्या का समाधान होगा बल्कि बेहतर आपूर्ति भी सुचारु होगी। अधिशासी अभियंता अंकित जैन ने बताया कि फरवरी से मंगलौर बिजली घर का निर्माण शुरू किया जाना है। नौ माह में कार्य पूर्ण होगा।