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लक्कड़पाला रातोंरात हरिद्वार जेल में शिफ्ट

Thu, 12 Jan 2017 10:08 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो रुड़की
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हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे खानपुर क्षेत्र के तुगलपुर निवासी लक्कड़ पाला उर्फ पाल सिंह उर्फ हरपाल को हिरासत में लेने के बाद रातोंरात हरिद्वार जेल में शिफ्ट कर दिया गया। इससे पहले पैरोल निरस्त होने पर बुधवार की देर शाम उसे हिरासत में लिया गया था।  आमतौर पर कैदी को देर शाम जेल बंद होने के बाद न तो जेल में लिया जाता है और न ही रिहा किया जाता है। दूसरी ओर लक्कड़पाला का अचानक पैरोल निरस्त होना प्रदेश सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार मामले में खानपुर के पूर्व विधायक प्रणव चैंपियन और पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने खुल कर विरोध किया था।
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उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव से पहले लक्कड़पाला की पैरोल मंजूर होने के बाद सियासी हलचल तेज हो गई थी। भाजपा के नेताओं की ओर से लगातार इस पर सवाल उठाए जा रहे थे। इसके बावजूद प्रदेश सरकार ने इसको दरकिनार कर दिया था, लेकिन आचार संहिता लागू होते ही अचानक हरकत में आए शासन प्रशासन ने रातोंरात लक्कड़पाला को जेल के पीछे डाल दिया। बुधवार की देर शाम लक्कड़पाला को पहले हिरासत में लिया गया और फिर देर रात ही उसे जेल में शिफ्ट कर दिया गया। ऐसे में प्रदेश सरकार के लिए यह झटका बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार लक्कड़पाला की पैरोल निरस्त करने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा और खानपुर के पूर्व विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन ने पैरवी की थी, जो कांग्रेस सरकार से बगावत कर भाजपा में शामिल हुए थे। मालूम हो कि पूर्व विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन के ससुर महेंद्र भाटी की हत्या के मामले लक्कड़पाला को आजीवन कारावास की सजा हो चुकी है। इसके अलावा कई अन्य मामले में भी वह दोषी है।

दो माह के लिए मंजूर हुई थी पैरोल
- विधायक महेंद्र सिंह भाटी हत्याकांड में सजा काट रहे लक्कड़पाला की पैरोल 23 दिसंबर 2016 को दो माह के लिए मंजूर हुई थी। लेकिन पैरोल को हुए एक माह भी नहीं बीत सका था कि शासन के आदेश पर 11 जनवरी की देर शाम उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
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क्या कहते हैं हरिद्वार जेलर
आमतौर पर देरशाम जेल बंद होने के बाद बंदियों को अंदर या फिर बाहर नहीं किया जा सकता, लेकिन जेल के कैदियों की पैरोल निरस्त होने की स्थिति में किसी भी समय उसे जेल में दाखिल किया जा सकता है। इसके अलावा मजिस्ट्रेट के निर्देश पर भी मुलजिम को किसी समय दाखिल किया जा सकता है।
.....एसएम सिंह, जेलर हरिद्वार

खादर के जंगलों में लक्कड़पाला का चलता था सिक्का
कभी खादर क्षेत्र में लक्कड़पाले का नाम का खौफ था। विधायक महेंद्र सिंह भाटी की हत्या में सजा पाने वाले पाल सिंह उर्फ लक्कड़पाला का खादर के जंगलों में सिक्का चलता था। डकैती की बड़ी वारदातों से लेकर अपहरण की घटनाओं तक में उसका नाम प्रमुख रूप से लिया जाता था। यही छवि लोगों के दिलों को दहलाती रही है। खानपुर बार्डर से सटे गांव बढ़ीवाला में आज भी लक्कड़पाला का घर है। जहां उसके परिजन सैकड़ों बीघा भूमि पर खेती करते हैं।

विधायक भाटी हत्याकांड में दोषी लक्कड़पाल का पैतृक घर खानपुर बार्डर से सटे उत्तरप्रदेश के गांव बढ़ीवाला में है। बताया जाता है कि लक्कड़पाला यहां से करीब दस साल पहले चंडीगढ़ शिफ्ट हो गया था। जबकि उसका एक भाई तथा भांजा यहीं रहकर करीब 400 बीघा जमीन में खेती करते हैं। लक्कड़पाला की खानपुर ब्लाक के तुगलपुर तथा शेरपुर गांव में भी करीब 350 बीघा जमीन बताई जाती है। जिसकी देखरेख उसके परिजन कर रहे हैं। महेंद्र फौजी गैंग में बड़ी भूमिका निभाने वाले लक्कड़पाला की खादर से लेकर यूपी तक तूती बोलती थी। साढ़े छह फुट कद काठी वाले लक्कड़पाला की पहचान इस बात को लेकर भी थी कि अपहरण जैसी वारदातों के दौरान भारी वजन उठाकर जंगलों के रास्ते भागने में माहिर था।  क्षेत्र में भी कई अपहरण के मामलों में उसका नाम सुर्खियों में रहा । जब से लक्कड़पाला बढ़ीवाला से परिवार सहित चंडीगढ़ में शिफ्ट हुआ। तब से उसके नाम की फिरौती जैसी घटनाएं बंद हो गई थी। वह कभी चंड़ीगढ़ तो कभी क्षेत्र में रहता रहा है। उसके खौफ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राग रागनियों में उसके नाम के किस्से गाए जाते थे।
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