गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में केंद्रीय हिंदी निदेशालय की व्याख्यानमाला आयोजित हुई। इसमें प्रो. सिंधु टीआई ने मलयालम कहानियों में स्त्री अस्मिता, स्वतंत्रता और शोषण के सवालों पर चर्चा की। उन्होंने साहित्य को समाज की जटिलताओं और व्यक्ति के अधिकारों को समझने का सशक्त माध्यम बताया।
प्रो. सिंधु ने कहा कि स्त्री और पुरुष दोनों को समान गरिमा, स्वतंत्रता और सुरक्षित जीवन का अधिकार है। उन्होंने भाषा, धर्म और वर्ग के आधार पर किसी भी भेदभाव को गलत बताया। व्याख्यान में मलयालम की चर्चित कहानियों के माध्यम से स्त्री शोषण, स्त्री-पुरुष संबंध और जीवन से जुड़े फैसले लेने की स्वतंत्रता पर बात हुई।
प्रो. सिंधु ने घरेलू हिंसा के संदर्भ में सांविधानिक और कानूनी अधिकारों की जानकारी को आवश्यक बताया। उन्होंने जोर दिया कि अधिकारों की जानकारी का अभाव उत्पीड़न की स्थिति को बढ़ाता है। प्रत्येक नागरिक को सम्मान और सुरक्षा के साथ जीवन जीने का अधिकार है। उन्होंने वैक्कम मुहम्मद बशीर की पुवन पझम’, किरण नीलकंठ पिल्लै की ‘मरप्पावकाल’ और पी वलसाला की ‘पेंबी’ का उल्लेख किया।