विधानसभा चुनाव की नामांकन प्रक्रिया समाप्त होने के बाद प्रचार और जनसंपर्क में नेताओं की नींद उड़ी हुई है। सुबह से देर रात तक जनसंपर्क और बैठकों का दौर चल रहा है। स्थिति यह है कि नेताओं को न लंच की चिंता है और न डिनर करने के लिए इनके पास समय है। चुनावी रण में फिलहाल सभी जीत के दावे कर रहे हैं, लेकिन मतदाताओं की चुप्पी से नेताओं के माथे पर चिंता की लकीरें हैं।
विधानसभा चुनाव में मतदान की तिथि जैसे-जैसे नजदीक आ रही है प्रत्याशियों की बेकरारी बढ़ती जा रही है। जनता को लुभाने के लिए सभी प्रत्याशी अपने-अपने दांव पेच चल रहे हैं, लेकिन लोगों की चुप्पी से राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों के माथे पर बल पड़ रहा है। हाल यह है कि नामांकन के बाद प्रत्याशियों की नींद गायब हो चुकी है। सुबह सात बजे से देर रात तक जनसंपर्क और बैठकों का दौर चल रहा है। यही नहीं प्रत्याशियों की ओर से देर रात को दिनभर के क्रियाकलापों की समीक्षा की जा रही है। सोमवार को अमर उजाला ने रुड़की विधानसभा से चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों की दिनचर्या जानी तो उनकी बेकरारी भी सामने आ गई। अधिकांश प्रत्याशियों का कहना है कि सुबह सात बजे से रात 12 बजे के बाद तक जनसंपर्क और बैठकों का दौर चल रहा है। देर रात को दिनभर के क्रियाकलापों की समीक्षा की जा रही है। जनसंपर्क और बैठकों के सियासी दांव पेच में प्रत्याशियों की नींद गायब है। अब देखना है कि जनता का विश्वास जीत पाने में कौन कामयाब हो पाता है।