रुड़की उपकारागार की टूटी दीवार
- फोटो : amarujala
उपकारागार की सुरक्षा में छेद ही छेद है। यह स्थिति तब है जब इस जेल से दो बार छह कैदी भागने में सफल रहे। जेल की सुरक्षा में सबसे बड़ी खामी जेल परिसर की मेन बाउंड्री है। यहां से कोई भी अंदर-बाहर जा सकता है। पूरे जेल परिसर में सीसीटीवी कैमरे, जैमर न होना भी एक बड़ी चूक है।
पंजाब की सबसे सुरक्षित माने जाने वाली नाभा जेल से छह कैदियों के फरार होने की घटना ने एक बार फिर से जेलों की सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा करने के संकेत दिए हैं। उप कारागार रुड़की जेल भी सुरक्षा के लिहाज से बेहद कमजोर है। यहां स्टाफ की कमी से लेकर कई ऐसी बातें हैं जो जेल की सुरक्षा व्यवस्था को कमजोर कर रही है। जबकि इस जेल से एक बार पांच और दूसरी बार एक कैदी फरार होने में कामयाब रहा। इसके अलावा जेल के बाहर हुई गैंगवार को भी सुरक्षा में खामी होना माना जाता है।
इस मामले में तत्कालीन जेलर आरके वर्मा की संलिप्तता होने की बात सामने आई थी। हालांकि इन घटनाओं के बाद जेल की सुरक्षा पर काम किया गया। जेल परिसर का गेट बड़ा किया गया। जेल परिसर की मेन बाउंड्री भी ऊंची बनाई गई। लेकिन, जेल के पीछे नई कचहरी रोड पर रखे ट्रांसफार्मर के पास दीवार नहीं बनाई गई। इस अधूरी दीवार का इस्तेमाल कैदियों को भगाने में हो सकता है। जेल में सीसीटीवी कैमरे, जैमर न होना भी एक बड़ी चूक है। इसके अलावा कैदियों पर नजर रखने के लिए बनाए गए वाच टावर भी चालू नहीं हो पाए हैं। साथ ही हाईमास्ट लाइटें भी जेल में नहीं लगाई गई हैं।
जेपी द्विवेदी ने संभाला चार्ज
उपकारागार के नए जेलर के रूप में सोमवार को जेपी द्विवेदी ने चार्ज संभाला। द्विवेदी देहरादून जेल से स्थानांतरित होकर रुड़की आए हैं। जबकि उपकारागार रुड़की के जेलर प्रमोद पांडे को पुरसाड़ी चमोली की जेल में भेजा गया है। पुरसाड़ी जेल के जेलर कर्मराज चौहान को निलंबित किया गया है। उनके फोन से प्रवीण वाल्मीकि ने रुड़की के डेयरी स्वामी से चौथ मांगी थी। मामले का खुलासा होने पर उन्हें निलंबित किया गया है।