जय-जय शिव शंकर, कांटा लगे न कंकर...। कांवड़ यात्रा की तैयारियों को लेकर शासन-प्रशासन की ओर से बैठकें कर यही दावे किए जा रहे हैं, लेकिन कांवड़ पटरी की तस्वीर कुछ और ही बयां कर रही है। नारसन के पास डेढ़ किलोमीटर के दायरे में गड्ढों की तस्वीर शासन-प्रशासन की तैयारियों पर तमाम सवाल खड़ा कर रही है।
शासन-प्रशासन की ओर से 14 जुलाई से शुरू होने वाली कांवड़ यात्रा को लेकर प्रदेश से लेकर हरिद्वार में मैराथन बैठकें की जा रही हैं। बैठकों में आला अधिकारी कांवड़ यात्रा में शिवभक्तों को कोई भी परेशानी न होने के दावे कर रहे हैं। बाईपास, हाईवे और कांवड़ पटरी को दुरुस्त करने की लगातार बातें की जा रही हैं, लेकिन इन दावों से उलट कांवड़ पटरी की तस्वीर कुछ और ही बयां कर रही है।
दरअसल, नारसन क्षेत्र के मोहम्मदपुर पावर हाउस के पास से गुजर रही कांवड़ पटरी के डेढ़ किलोमीटर के दायरे में गड्ढे ही गड्ढे नजर आ रहे हैं। आलम यह है कि गड्ढों के अलावा नुकीले पत्थर जगह-जगह डेड़ किमी के दायरे में पड़े हैं और गंगनहर पटरी किनारे कांटों भरी झाड़ियां खड़ी हैं। ऐसे में कांवड़ पटरी से गुजरने वाले शिवभक्तों को इन गड्ढों से होकर गुजरना पड़ेगा। डेढ़ किमी के दायरे को देखकर बहरहाल यही अंदाजा लगाया जा सकता है कि शिवभक्तों को कांटा भी लगेगा और कंकर भी। हालांकि, अधिकारियों का तर्क है कि जहां-जहां कांवड़ पटरी पर गड्ढे हैं, उन्हें दुरुस्त करने का काम जल्द पूरा कर लिया जाएगा।