IIलक्सर व मंगलौर के पानी के बिलों में हुई थी गड़बड़ी
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Iकेवल एक कर्मचारी पर कार्रवाई कर रफा-दफा कर दिया गया था पूरा मामला
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Iजल संस्थान में पानी के बिलों में गड़बड़ी कर लाखों रुपये की हेराफेरी का मामला चार दिन पहले सामने आया है। हालांकि इससे पहले भी जल संस्थान में पानी के बिलों को जमा करने के नाम पर 1.56 करोड़ का घोटाला हो चुका है, लेकिन इस मामले में लीपापोती कर दी गई थी। इतने बड़े घोटाले में मात्र एक कर्मचारी पर कार्रवाई कर पूरे मामले को रफा-दफा कर दिया था। मामले से जुड़े कर्मचारी को तीन माह पहले ही बर्खास्त किया गया है।
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Iजल संस्थान में वर्ष 2023 में भी पानी के बिलों में घोटाला सामने आया था। हालांकि यह घोटाला लक्सर और मंगलौर के पानी के बिलों से संबंधित था। जब उपभोक्ताओं के बिल में जमा किया गया पुराना बिल जुड़कर आया तो गड़बड़ी का पता चला। हालांकि इस बार का घोटाला बेहद चालाकी से किया गया। इसमें किसी भी उपभोक्ता के पानी के बिल में पुराना बिल नहीं जोड़ा गया।
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Iवर्ष 2023 में हुए घोटाले के सामने आने के बाद जांच कराई गई तो 1.56 करोड़ की हेराफेरी सामने आई थी। विभागीय अधिकारियों ने इतने बड़े घोटाले की एसआईटी जांच कराने के बजाए, केवल विभागीय स्तर तक ही जांच को सीमित रखी। जांच में एक कर्मचारी को दोषी पाया। उसे निलंबित कर दिया गया। तीन माह पहले पेयजल सचिव ने कर्मचारी को बर्खास्त कर दिया, लेकिन इस मामले से कोई और जुड़ा है या नहीं, इसकी जांच नहीं की गई। न ही उपभोक्ताओं की ओर से जमा किए गए 1.56 करोड़ की रिकवरी पर ही आज तक कोई कदम उठाया गया है। जानकारों का मानना है कि दो-तीन साल तक पानी के बिलों में गड़बड़ी हुई, एक कर्मचारी 1.56 करोड़ विभाग गबन कर गया और किसी को इसकी भनक न लग पाना सवालों के घेरे में है।I