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बांधों के लिए सुरक्षा तंत्र विकसित करना जरूरी

Sat, 18 Feb 2017 11:19 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो रुड़की
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राष्ट्रीय डैम सेफ्टी कांफ्रेंस के उद्घाटन पर केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा पुनरुद्धार मंत्रालय के सचिव डा. अमरजीत सिंह ने कहा कि देश के बांधों में 300 बिलियन क्यूबिक मीटर पानी स्टोर करने की क्षमता है। इसे 600 बिलियन क्यूबिक मीटर तक बढ़ाने की जरूरत है। अमेरिका 3000 बिलियन क्यूबिक मीटर जल स्टोर कर सकता है। इसे देखते हुए देश के मौजूदा बांधों की शत-प्रतिशत सुरक्षा के लिए तंत्र विकसित करना बहुत जरूरी है।
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शनिवार को आईआईटी के मल्टी एक्टिविटी सेंटर में केंद्रीय जल आयोग, उत्तराखंड जल विद्युत निगम एवं आईआईटी रुड़की के संयुक्त तत्वावधान में तीसरी राष्ट्रीय डैम सेफ्टी कांफ्रेंस आयोजित की गई। इसे संबोधित करते हुए डा. अमरजीत सिंह ने बताया कि केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट ‘डैम सेफ्टी रिहेबिलिएशन एंड इंप्रूवमेंट प्रोजेक्ट (ड्रिप)’ वर्ल्ड बैंक के सहयोग से वर्ष 2012 में शुरू किया गया है।  वर्तमान में इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत सात राज्यों (झारखंड, कर्नाटका, केरल, मध्यप्रदेश, ओड़ीसा, तमिलनाड़ुू और उत्तराखंड) को शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य मौजूदा बांधों की शत-प्रतिशत सुरक्षा के लिए तंत्र विकसित करना है। वर्ष 1979 में राजकोट स्थित बांध से पानी छोड़ने पर 200 लोगों की मौत हुई थी, वर्ष 1917 में मध्यप्रदेश में 1000 लोग मारे गए। हाल ही में गुजरात में बांध से अचानक पानी छोड़े जाने से 25 छात्रों की जान चली गई। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का प्रयास है कि ड्रिप प्रोजेक्ट के जरिये बांधों की नियमित निगरानी, लीकेज मरम्मत करने की तकनीक विकसित करने, सिल्ट की समस्या के समाधान करने सहित सभी प्रकार के खतरों के समाधान पर जोर दिया जा रहा है। साथ ही पानी स्टोर करने की क्षमता में वृद्धि करना भी इसका प्रमुख उद्देश्य है। फिलहाल सात राज्यों में इस पर काम हो रहा है। जल्द ड्रिप का फेज-टू शुरू हो रहा है। उसमें सभी राज्यों को शामिल किया जाएगा। दो दिवसीय नेशनल कांफ्रेंस में देश-विदेश के करीब 400 विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। इस दौरान आईआईटी निदेशक प्रो. एके चतुर्वेदी, प्रमुख सचिव उत्तराखंड उमाकांत पंवार, डा. एम परेरा, डा. एसके मिश्रा, डा. नयन शर्मा आदि मौजूद रहे।

डैम की सुरक्षा को जापान का सहयोग
कांफ्रेंस में प्रमुख सचिव डा. उमाकांत ने बताया ड्रिप प्रोजेक्ट के तहत भारत में डैम की सुरक्षा के लिए जापान के वैज्ञानिकों का सहयोग लिया जा रहा है। जापान में भूकंप ज्यादा आते हैं, इसलिए वहां की तकनीकी के इस्तेमाल पर जोर दिया गया है। प्रदेश में 15 डैम हैं। इनमें से पांच डैम पर 200 करोड़ की लागत से काम किया जा रहा है। साथ ही उत्तराखंड जल विद्युत निगम के विशेषज्ञों को जापान में प्रशिक्षण भी दिलाया गया है। उनकी कोशिश डैम के क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल कर देशभर में इसे कंसल्टेंसी के रूप में उपयोग करने की है।  
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संस्थानों में सरकार की रुचि से मिलेगी कामयाबी
आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. एके चतुर्वेदी ने कहा कि देश के संस्थानों में पहले भी उम्दा रिसर्च होती थी, लेकिन पिछले कुछ सालों में सरकार और संस्थानों के बीच संवाद बढ़ा है। इससे अगले दस सालों में एक तकनीक तंत्र विकसित होने की पूरी उम्मीद है। वह तंत्र न केवल राष्ट्रीय स्तर पर होगा, बल्कि उससे विश्वस्तर पर तकनीक का आदान-प्रदान भी हो सकेगा।

जल्द बनेगा डैम सेफ्टी डैम लॉ
 केंद्र सरकार की योजना डैम सेफ्टी लॉ को लाने की है। इस पर वैज्ञानिकों से रायशुमारी का काम चल रहा है। डा. अमर जीत सिंह ने बताया कि लॉ के अस्तित्व में आने के बाद डैम से संबंधित कम्यूनिकेशन सिस्टम, मॉनिटरिंग, ऑपरेशनल और सेफ्टी आदि पर स्थायी काम हो सकेगा। जल्द इसका खाका तैयार कर केंद्र को भेजा जाएगा।

मेक इंडिया के तहत देश निर्मित तंत्र होगा विकसित
 केंद्रीय सचिव डा. अमर जीत सिंह ने बताया कि केंद्र सरकार डैम की सुरक्षा एवं तकनीक विकसित करने के प्रति गंभीर है। मेक इन इंडिया के तहत देश निर्मित तकनीक तंत्र विकसित करने पर भी भारी जोर है। इसके तहत आईआईटी जैसे संस्थानों में डैम के लिहाज से रेगुलर कोर्सेज लाने, स्टूडेंट की मदद लेने आदि के जरिये एक कोर टीम तैयार की जाएगी। जो देश की जरूरतों को पूरा कर सकेगी। इसके लिए आईआईटी रुड़की सहित अन्य तकनीकी संस्थानों का सहयोग लिया जा रहा है।
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