फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

फीस नहीं होने से पढ़ाई बीच में छोड़ रही थी छात्राएं, चिकित्सक बने मददगार

विज्ञापन
विज्ञापन
आर्थिक तंगी के चलते पढ़ाई बीच में छोड़ने को मजबूर एक इंटर कॉलेज की छात्राओं के लिए रुड़की के चिकित्सक मददगार बनकर सामने आए हैं। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन से जुड़े चिकित्सकों ने इंटर कॉलेज की ऐसी 20 छात्राओं की फीस, ड्रेस और किताबों समेत अन्य सभी जरूरतों को पूरा करने का जिम्मा लिया है।
विज्ञापन

गणेशपुर स्थित कन्या पाठशाला माध्यमिक विद्यालय के संरक्षक सतेंद्र कुमार ने बताया कि यहां एक हजार से अधिक छात्राएं अध्ययनरत हैं। ज्यादातर छात्राएं आसपास के गांवों से गरीब परिवारों से हैं। कॉलेज प्रबंधन की ओर से बिना सरकारी सहायता के लोगों की मदद से भवन, फर्नीचर और अन्य सभी सुविधाएं जुटाई गई हैं लेकिन कॉलेज में कक्षा नौ से 12वीं तक की कई छात्राएं पढ़ाई बीच में छोड़ रही थीं। जब कारणों का पता किया तो उनके अभिभावकों ने फीस नहीं होने की बात कही। इस पर आईएमए के अध्यक्ष डा. राम सुभग सैनी, सचिव डा. अजय सिंह पंवार ने तुलसी हास्पिटल के संचालक डा. नवीन बंसल से चर्चा की। इसपर उन्होंने फीस नहीं दे पा रही सभी छात्राओं की जानकारी ली और वे मदद के लिए तैयार हो गए। अब आईएमए के दस चिकित्सकों ने ऐसी 20 छात्राओं की पढ़ाई का खर्च उठाने का जिम्मा ले लिया है। उन्होंने और लोगों से भी आगे आने की अपील की।
इन चिकित्सकों ने उठाया बीड़ा
डॉ. नवीन बंसल ने तीन, डॉ. सुधी अग्रवाल ने एक, डॉ. संजीव गर्ग ने पांच, डॉ. गोपाल ने दो, डॉ. श्रीमोहन ने एक, डॉ. एसएन बंसल ने एक, डॉ. एसके गोयल ने दो, डॉ. अजय भार्गव ने दो, डॉ. मधुरिमा ने एक और डॉ. विनय सैनी ने दो छात्राओं का साल भर का स्कूल खर्च देने का बीड़ा उठाया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें