रुड़की आईआईटी द्वारा तैयार की गई फेश शिल्ड।
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आईआईटी रुड़की ने एम्स ऋषिकेश के हेल्थकेयर पेशेवरों की कोविड-19 से फ्रंटलाइन सुरक्षा के लिए कम लागत वाला फेस शील्ड विकसित किया है। फेस शील्ड का फ्रेम 3-डी प्रिंटेड है और कोरोना रोगियों के वार्ड में प्रवेश करते समय स्वास्थ्यकर्मी अन्य सुरक्षा उपकरणों के साथ इसका उपयोग कर सकेंगे। बड़े पैमाने पर इसके निर्माण में प्रति शील्ड की लागत मात्र 25 रुपये है।
शील्ड के सुरक्षा कवच का डिजाइन स्पेक्टेकल की तरह है और इसको बदलना बेहद आसान है, क्योंकि पारदर्शी शीट दोबारा उपयोग में आने वाली फ्रेम से बंधी नहीं होती है। शीट की लागत केवल पांच रुपये है। प्रति शील्ड की निर्माण लागत लगभग 45 रुपये है, लेकिन बड़े पैमाने पर निर्माण में प्रति शील्ड केवल 25 रुपये की लागत आएगी। एम्स ऋषिकेश के निदेशक प्रो. रविकांत ने कहा कि फ्रंटलाइन हेल्थकेयर पेशेवरों की सुरक्षा के लिए फेस शील्ड विकसित करने के इस सराहनीय काम के लिए आईआईटी रुड़की की टीम बधाई की पात्र है। यह फेस शील्ड न केवल हमारे संस्थान बल्कि पूरे देश के स्वास्थ्य कर्मियों के लिए बहुत उपयोगी सिद्ध होगा।
इस शील्ड को आईआईटी रुड़की के द टिंकरिंग लैब में विकसित किया गया है। टिंकरिंग लैब आईआईटी रुड़की के छात्रों के लिए एक तकनीकी सुविधा है। लैब के समन्वयक प्रो. अक्षय द्विवेदी ने बताया कि यह फेस शील्ड उन सभी स्वास्थ्यकर्मियों के लिए हमारी ओर से एक छोटी सी भेंट है, जो मानवजाति के कल्याण के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं। आईआईटी निदेशक प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि कोविड-19 रोगियों की देखभाल में जुटे स्वास्थ्यकर्मियों के लिए लिए यह फेस शील्ड बीमारी के संचरण जोखिम को कम करने में मदद करेगी। एम्स ऋषिकेश के अनुरोध पर पहले 100 फेस शील्ड संस्थान को भेजे जाएंगे।